हनुमानगढ़ के टिब्बी क्षेत्र में स्थापित होने वाला विशाल एथेनॉल औद्योगिक संयंत्र अब विकास, रोजगार और पर्यावरणीय संतुलन की नई कहानी लिखने की तैयारी में है। राठीखेड़ा स्थित चक 5 आरके में ड्यून इथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित 1320 केएलपीडी अनाज-आधारित इथेनॉल प्लांट और 24.5 मेगावाट सह-उत्पादन विद्युत संयंत्र को लेकर बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में एक विस्तृत कार्यशाला आयोजित हुई, जिसमें प्रशासन, विशेषज्ञों, औद्योगिक प्रतिनिधियों और जनप्रतिनिधियों ने परियोजना से जुड़े तथ्यों, भ्रांतियों और संभावित लाभों पर विस्तार से चर्चा की।

कार्यशाला की शुरुआत जिला कलेक्टर डॉ. खुशाल यादव और पुलिस अधीक्षक हरी शंकर की मौजूदगी में हुई। हालांकि धरने पर बैठे किसान इस कार्यशाला में आमंत्रित किए गए थे, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। अतिरिक्त जिला कलेक्टर उम्मेदी लाल मीना ने बताया कि प्रशासन द्वारा अब तक कई दौर की कार्यशालाएं आयोजित की जा चुकी हैं, जिनमें वास्तविक आंकड़ों और तथ्यों को आमजन के समक्ष रखा गया है ताकि किसी भी प्रकार की भ्रांति न रहे।

प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारी पामुल कुमार ने बताया कि राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने पहले ही इस औद्योगिक इकाई को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया है। संयंत्र का संचालन शुरू होने के बाद पृथक रूप से सहमति लेनी होगी, जिसका नवीनीकरण हर पांच वर्ष में किया जाएगा। साथ ही, तीन-तीन माह के अंतराल पर नियमित निरीक्षण भी होगा और किसी भी कमी की स्थिति में इकाई को नोटिस से लेकर बंद करने तक की कार्रवाई संभव है।

उद्योग प्रतिनिधियों ने बताया कि संयंत्र में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग होगा। बैनूर, चंडीगढ़ में स्थापित उनकी पूर्व इकाई की तर्ज पर यहां भी जीरो वॉटर डिस्चार्ज प्रणाली लागू की जाएगी, जिसके कारण संयंत्र से निकला प्रत्येक बूंद पानी पुनः उपयोग में लाई जाएगी। इससे भूजल या बाहरी जल स्रोत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इकाई में स्थापित होने वाले आधुनिक ईटीपी इसके मुख्य आधार होंगे।

परियोजना से रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। प्रतिनिधियों के अनुसार संयंत्र पूर्ण क्षमता से चलते ही तीन पारियों में 750 अकुशल, 125 कुशल, 100 अर्द्धकुशल तथा 150 संविदा श्रमिकों की आवश्यकता होगी। स्थानीय उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अतिरिक्त परिवहन, किराए के मकानों, दुकानों, भोजनालयों और अन्य सेवाओं के माध्यम से हजारों लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से आजीविका मिलेगी। कंपनी ने सीएसआर गतिविधियों हेतु पांच करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जिन्हें सरकारी एजेंसियों व पंचायतों के साथ मिलकर व्यय किया जाएगा।

पर्यावरण संरक्षण पर भी परियोजना का ध्यान रहेगा। कुल क्षेत्रफल के 33 प्रतिशत हिस्से पर दस हजार पौधों का सघन पौधरोपण किया जाएगा। 70 मीटर ऊंची चिमनियों के साथ पाँच इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रीसिपिटेटर लगाए जाएंगे जो वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में सक्षम होंगे। बॉयलरों से उत्पन्न राख को बेलनाकार साइलो में संग्रहित किया जाएगा ताकि धूल का फैलाव न हो। इस राख का उपयोग ईंट-भट्टों और राजमार्ग निर्माण में किया जाएगा जिसके लिए एमओयू की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

कच्चे माल के तौर पर चावल, मक्का और पराली का उपयोग होने से जिले के किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। अनुमानित 9,76,500 टन से अधिक चावल और मक्का की वार्षिक खपत से इन फसलों को नई मांग मिलेगी और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। पराली के प्रबंधन से प्रदूषण कम होगा और किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर बढ़ेंगे।

उद्योग प्रतिनिधियों ने बताया कि यह परियोजना पूरी तरह राजस्थान एथेनॉल उत्पादन प्रोत्साहन नीति 2021 और रिप्स 2022 के मानकों के अनुरूप है। भूमि रूपांतरण, एथेनॉल स्टोरेज की अनुमति, पेट्रोलियम एवं एक्सप्लोसिव सेफ्टी की मंजूरी, एनवायरमेंट क्लीयरेंस, कन्सेंट टू एस्टेब्लिशमेंट, सीजीडब्ल्यूए से जल उपयोग की अनुमति तथा एक्साइज अनुमतियां सभी नियमानुसार प्राप्त कर ली गई हैं।

टिब्बी की धरती पर स्थापित होने वाली यह अत्याधुनिक एथेनॉल इकाई न केवल हरित ऊर्जा के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, बल्कि स्थानीय परिवारों की आर्थिक उन्नति, रोजगार संवर्धन और समग्र क्षेत्रीय विकास की एक मजबूत आधारशिला भी बनेगी।

Pratahkal Bureau

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