राठीखेड़ा एथेनॉल प्लांट विवाद: टिब्बी में महापंचायत के बाद बेकाबू हुई भीड़, फैक्ट्री परिसर में आगजनी और तोड़फोड़
टिब्बी के राठीखेड़ा में निर्माणाधीन एथेनॉल प्लांट के विरोध में महापंचायत के बाद भीड़ उग्र हो गई। प्रशासन के आश्वासन के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने फैक्ट्री परिसर में पथराव, आगजनी और तोड़फोड़ की। कई वाहन जले, अधिकारी घायल हुए। जिला प्रशासन ने कानूनन कार्रवाई और स्थिति सामान्य करने के प्रबंध तेज किए।

हनुमानगढ़, 10 दिसंबर। टिब्बी के राठीखेड़ा में निर्माणाधीन एथेनॉल औद्योगिक इकाई के विरोध ने बुधवार को अचानक उग्र रूप ले लिया। उपखंड मुख्यालय पर बुलाई गई महापंचायत में करीब पाँच हजार लोगों की भीड़ उमड़ी, जहाँ जनप्रतिनिधियों के संबोधनों के बीच फैक्ट्री का कार्य तुरंत बंद करवाने और जिला कलेक्टर तथा पुलिस अधीक्षक को मौके पर बुलाकर वार्ता करने की मांग जोर पकड़ती चली गई। मंच पर मौजूद सांसद कुलदीप इंदौरा, संगरिया विधायक अभिमन्यु पुनिया, पूर्व विधायक बलवान पूनिया सहित कई सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने भीड़ को संबोधित किया, वहीं माहौल धीरे-धीरे तनावपूर्ण होता गया।
सभा के दौरान टिब्बी उपखंड अधिकारी सत्यनारायण सुथार ने सार्वजनिक मंच से आश्वस्त किया कि प्रशासन स्थानीय भावनाओं को देखते हुए कंपनी के निर्माण कार्य को रोकने के लिए सहमत है और इसका लिखित आश्वासन देने को भी तैयार है। कंपनी प्रतिनिधियों ने भी तत्काल प्रभाव से निर्माण कार्य रोकने की सहमति जताई। यह जानकारी जनप्रतिनिधियों—मंगेज चौधरी, बलवान पूनिया तथा सांसद-विधायक—को व्यक्तिगत रूप से भी दी गई। इसके बावजूद भीड़ उग्र हो गई और बिना अनुमति के सीधे फैक्ट्री परिसर की ओर बढ़ गई।
फैक्ट्री पहुंचते ही स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया और देखते ही देखते आगजनी एवं हिंसक तोड़फोड़ की घटनाएँ सामने आने लगीं। प्रदर्शनकारियों ने ट्रैक्टर चढ़ाकर परिसर में घुसने का प्रयास किया। इस दौरान कई पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी घायल हो गए। उग्र भीड़ ने दस निजी वाहन, एक पुलिस वाहन, चार मोटरसाइकिलों तथा फैक्ट्री कर्मियों के कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। आवासीय परिसर को भी नुकसान पहुंचाया गया। इसके अतिरिक्त एक जेसीबी मशीन जला दी गई तथा दो अन्य जेसीबी को क्षतिग्रस्त कर दिया गया।
पुलिस ने स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए लगातार प्रयास किए, लेकिन भीड़ की संख्या इतनी अधिक थी कि तत्काल कार्रवाई करना संभव नहीं हो पाया। शाम लगभग 7:20 बजे प्रदर्शनकारी टिब्बी गुरुघर की ओर कूच कर गए और बाद में वहीं धरना देने की घोषणा करते हुए लौट गए। घटना के समय क्षेत्र में धारा बीएनएस 163 लागू थी।
जिला प्रशासन ने जानकारी दी कि प्रदर्शनकारियों को इससे पहले भी कई बार संवाद के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन हर बार बातचीत से इंकार किया गया। 3 दिसंबर को जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में फैक्ट्री प्रतिनिधियों और जनप्रतिनिधियों के साथ कलेक्ट्रेट में बैठक निर्धारित थी, लेकिन प्रदर्शनकारी उपस्थित नहीं हुए। प्रशासन और फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से लगातार शंकाओं के समाधान के प्रयास, बैठकें और अखबारों में प्रकाशित स्पष्टीकरण के बावजूद वार्ता से लगातार परहेज किया गया। यहाँ तक कि कंपनी द्वारा पहले से संचालित प्लांटों के अवलोकन के लिए प्रदर्शनकारियों को आमंत्रित किया गया, जिसे भी उन्होंने अस्वीकार कर दिया।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति को क्षति पहुंचाने वाली ऐसी हिंसक घटनाओं पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी और क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। राठीखेड़ा एथेनॉल प्लांट विवाद ने अब क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और औद्योगिक विकास के भविष्य को लेकर गंभीर बहस खड़ी कर दी है।

Pratahkal Bureau
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