हनुमानगढ़/जयपुर, 23 दिसम्बर।

राज्य सरकार की दूसरी वर्षगांठ पर राजस्थान के विकास मॉडल में महिलाओं की बदलती भूमिका एक सशक्त कहानी बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में प्रदेश ने महिला सशक्तिकरण को केवल नारा नहीं, बल्कि ठोस नीतियों और योजनाओं के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक बदलाव का आधार बनाया है। “बढ़ता राजस्थान–हमारा राजस्थान” की संकल्पना के तहत सरकार ने महिलाओं और बालिकाओं के जीवन के हर पड़ाव को मजबूती देने की दिशा में निरंतर कदम बढ़ाए हैं।

सरकार के विजन का केंद्र बिंदु आर्थिक रूप से सक्षम, शिक्षित और स्वस्थ महिला रही है। इसी सोच के अनुरूप ग्रामीण अंचलों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए योजनाओं का व्यापक विस्तार किया गया। राजीविका मिशन के अंतर्गत लखपति दीदी योजना ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में नया आत्मविश्वास भरा है। अब तक 19 लाख से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण देकर 12.06 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ के रूप में स्थापित किया जा चुका है, जिससे वे स्वरोजगार और उद्यमिता के माध्यम से आर्थिक मजबूती हासिल कर रही हैं।

महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री मातृत्व पोषण योजना और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से लाखों गर्भवती महिलाओं को आर्थिक और पोषण संबंधी सहायता दी गई। मातृत्व पोषण योजना के तहत 5.09 लाख महिलाओं को लगभग 170 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई, वहीं मातृ वंदना योजना से 9.92 लाख महिलाओं को 531 करोड़ रुपये का संबल मिला। इसके साथ ही किशोरियों और महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए 1.22 करोड़ महिलाओं को प्रतिमाह निःशुल्क सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

राज्य सरकार की पहल पर शुरू की गई मुख्यमंत्री रसोई गैस सब्सिडी योजना ने महिलाओं के स्वास्थ्य और घरेलू जीवन में बड़ा बदलाव किया है। मात्र 450 रुपये में गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने वाली इस योजना के तहत अब तक 4.82 करोड़ सिलेंडरों पर 867 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा चुकी है। इससे महिलाओं को धुएं से होने वाले स्वास्थ्य जोखिम से राहत मिली है और उनका जीवन स्तर बेहतर हुआ है।

शिक्षा के क्षेत्र में भी बालिकाओं को आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने ठोस कदम उठाए। 4.14 लाख स्कूली छात्राओं को 181 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी गई, जिससे शिक्षा तक उनकी पहुंच सुदृढ़ हुई। कृषि शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि संकाय की 58 हजार से अधिक छात्राओं को 103 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। इसके अलावा, आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी छात्राओं को 10.51 लाख साइकिलें और लगभग 40 हजार स्कूटियां देकर उच्च शिक्षा की राह आसान की गई।

सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर एकल नारी सम्मान पेंशन योजना और मुख्यमंत्री कन्यादान योजना ने महिलाओं को सम्मानजनक जीवन का आधार दिया। एकल नारी पेंशन योजना के तहत 19.24 लाख महिला पेंशनर्स को 6,234 करोड़ रुपये की सहायता दी गई, जबकि कन्यादान योजना से 24 हजार से अधिक कन्याओं के विवाह में 96 करोड़ रुपये से अधिक की मदद की गई। लाडो प्रोत्साहन योजना के माध्यम से बेटियों के जन्म से युवावस्था तक आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की गई है, जिसके तहत 4.60 लाख बालिकाओं को पहली किश्त प्रदान की जा चुकी है।

स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने की दिशा में मा वाउचर योजना एक महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आई है। इस योजना के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं को दूसरी और तीसरी तिमाही में निःशुल्क सोनोग्राफी की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। अब तक 2.26 लाख से अधिक सोनोग्राफी की जा चुकी हैं, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में मदद मिली है।

राज्य सरकार के दो वर्षों का यह कार्यकाल महिला सशक्तिकरण को योजनाओं से आगे बढ़ाकर जमीनी बदलाव में बदलने की कहानी कहता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में उठाए गए ये कदम न केवल महिलाओं को सशक्त बना रहे हैं, बल्कि विकसित राजस्थान के सपने को भी नई मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

Pratahkal Bureau

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