राजस्थान गो सेवा समिति ने गौशालाओं की समस्याओं पर जताई नाराजगी, सौंपा ज्ञापन — 15 नवंबर तक समाधान नहीं तो प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
राजस्थान गो सेवा समिति ने गौशालाओं को सहायता राशि और भूमि आवंटन में हो रही देरी को लेकर नोहर में पूर्व विधायक अभिषेक मटोरिया को ज्ञापन सौंपा। समिति ने चेतावनी दी कि 15 नवंबर तक कार्रवाई न होने पर 16 नवंबर से प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।

नोहर, 10 नवंबर।
राज्य की गौशालाओं को समय पर सहायता राशि न मिलने और भूमि आवंटन में हो रही देरी को लेकर राजस्थान गो सेवा समिति ने नाराजगी जताते हुए प्रदेश सरकार के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है। समिति के अध्यक्ष दयाराम शीलू के नेतृत्व में सोमवार को झापन में पूर्व विधायक अभिषेक मटोरिया को ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें गौशालाओं से जुड़ी लंबित मांगों पर त्वरित कार्रवाई की मांग की गई।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि समिति द्वारा पहले भी गोपालन विभाग को कई बार अवगत कराया गया है कि राज्यभर में संचालित गौशालाओं को दी जाने वाली सहायता राशि का भुगतान समय पर नहीं हो रहा है। कई गौशालाएं पिछले एक वर्ष से अनुदान के अभाव में आर्थिक संकट से गुजर रही हैं। इसके साथ ही, अनेक गौशालाएं ऐसी गौचर भूमि पर संचालित हैं जिनका अभी तक विधिवत भूमि आवंटन नहीं हुआ है। भूमि आवंटन के अभाव में ये गौशालाएं जनसहभागिता योजना के तहत मिलने वाले सरकारी लाभ से भी वंचित हैं।
समिति ने आरोप लगाया कि विभाग की ओर से बार-बार निवेदन के बावजूद अब तक कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई है। इस पर समिति की आपात बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि 15 नवंबर तक सरकार द्वारा इन मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो 16 नवंबर से प्रदेशव्यापी आंदोलन प्रारंभ किया जाएगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान तहसील अध्यक्ष दयाराम शीलू के साथ तहसील सचिव बशीलाल व्यास, महिपाल सैनी, श्रवण कुमार पारीक, महावीर प्रसाद लाटा, नंदलाल पारीक, बजरंग लाल पारीक, रामचंद्र पारीक और नरेंद्र भीडासरा सहित कई गौभक्त उपस्थित रहे।
पूर्व विधायक अभिषेक मटोरिया ने ज्ञापन प्राप्त करते हुए समिति को आश्वासन दिया कि वे उनकी मांगों को राज्य सरकार और संबंधित विभाग तक पहुंचाएंगे तथा समस्या के शीघ्र समाधान के लिए प्रयास करेंगे।
यह मुद्दा प्रदेश के सैकड़ों गौशालाओं के भविष्य से जुड़ा है, जहां हजारों गौवंश संरक्षित एवं संपोषित हैं। समय पर सहायता राशि और भूमि आवंटन न मिलने से इन संस्थाओं की आर्थिक स्थिति डांवाडोल हो गई है। अब सबकी निगाहें सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि आंदोलन होगा या समाधान।

Pratahkal Bureau
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