नोहर के लाल का जयपुर में जलवा: मूत्र से बनाया 'अमृत', मुख्यमंत्री ने दिया 2.5 लाख का इनाम और विदेश यात्रा का टिकट
हनुमानगढ़ के नोहर स्थित पीएम श्री स्कूल के छात्र ललित और उनकी टीम ने राज्य स्तरीय युवा महोत्सव 2026 में मूत्र से जैविक उर्वरक बनाने के आविष्कार पर प्रथम पुरस्कार जीता है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने छात्रों को 2.5 लाख रुपये और विदेश भ्रमण का पुरस्कार दिया। सस्टेनेबल कृषि और IoT तकनीक पर आधारित इस नवाचार ने पूरे राजस्थान को गौरवान्वित किया है।

नोहर। रेगिस्तानी मिट्टी के सपूतों ने अपनी मेधा से जयपुर की धरती पर वो कर दिखाया, जिसकी गूँज अब सात समंदर पार तक सुनाई देगी। नोहर स्थित पीएम श्री श्रीहजारीमल जोरमल पेड़ीवाल राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के छात्रों ने राज्य स्तरीय युवा महोत्सव 2026 में इतिहास रचते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इस टीम के नेतृत्वकर्ता कक्षा 10 के छात्र ललित और उनके साथियों ने कचरे से कंचन बनाने की कहावत को चरितार्थ करते हुए 'मूत्र (यूरिन) से उपयोगी उत्पाद' बनाने का एक ऐसा अभूतपूर्व आविष्कार किया है, जिसने वैज्ञानिकों और नीति-निर्धारकों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस नवाचार की सराहना करते हुए टीम को 2.5 लाख रुपये का नकद पुरस्कार, ट्रॉफी और अंतरराष्ट्रीय भ्रमण के अवसर से नवाजा है।
इस गौरवशाली उपलब्धि की नींव जिला स्तर पर ही पड़ गई थी, जहाँ से जीत का परचम लहराते हुए यह टीम जयपुर पहुँची थी। 'थीमेटिक श्रेणी' में पेश किया गया यह प्रोजेक्ट न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी छलांग है, बल्कि जैव-उर्वरक उत्पादन और सस्टेनेबल कृषि के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव लाने का सामर्थ्य रखता है। टीम के मुख्य सदस्य साहिल, राजेंद्र, प्रिंस और अमिता ने अपने सहयोगी प्रितम और सौरभ के साथ मिलकर इस जटिल तकनीक को सरलता से धरातल पर उतारा। छात्रों ने प्रदर्शित किया कि कैसे मानव अपशिष्ट को एक बहुमूल्य संसाधन में बदलकर रासायनिक खादों पर निर्भरता कम की जा सकती है।
तकनीकी बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए टीम के मेंटर शिक्षक सतीश जिंदल ने बताया कि इन बच्चों ने चुनौतियों को अवसर में बदलने का जज्बा दिखाया है। यह आविष्कार मुख्य रूप से NPK (नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटैशियम) सेंसर और IoT आधारित कृषि ऑटोमेशन से प्रेरित है, जो जैविक उर्वरक के उत्पादन को न केवल सस्ता बनाएगा बल्कि इसे आम किसान की पहुंच तक भी ले जाएगा। मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए सम्मान ने इन नन्हे वैज्ञानिकों के हौसलों को नई उड़ान दी है, जिससे वे अब वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकेंगे।
विद्यालय के प्रधानाचार्य महेंद्र मिश्रा ने इस ऐतिहासिक पल को 'पीएम श्री योजना' की सफलता का जीवंत उदाहरण बताया है। उन्होंने कहा कि जिला से राज्य स्तर तक की यह यात्रा विद्यार्थियों के कठोर परिश्रम का परिणाम है और आगामी समय में इन युवा वैज्ञानिकों को संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। भविष्य की योजनाओं को साझा करते हुए छात्र ललित की टीम ने संकेत दिया है कि वे अब Arduino-आधारित रोबोटिक्स और एडवांस सेंसर इंटीग्रेशन पर अपना ध्यान केंद्रित करेंगे। यह जीत केवल एक विद्यालय की नहीं, बल्कि पूरे नोहर क्षेत्र के लिए तकनीकी क्रांति का एक नया सवेरा है।

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