नोहर में राठीखेड़ा इथेनॉल फैक्ट्री विवाद: विधायक अमित चाचणा ने किसानों पर लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की
नोहर के राठीखेड़ा गांव में इथेनॉल फैक्ट्री को लेकर किसानों पर पुलिस लाठीचार्ज की घटनाओं के बीच विधायक अमित चाचणा ने सरकार पर किसानों को दबाने और पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया। किसानों की समस्याएं और मंडियों में फसलों की बिक्री विफलता भी उठाई गई।

नोहर, 11 दिसंबर। टिब्बी के राठीखेड़ा गांव में निर्माणाधीन इथेनॉल फैक्ट्री को लेकर उपजा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। नोहर विधायक अमित चाचणा ने इस दौरान किसानों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज की तीव्र निंदा की और आरोप लगाया कि सरकार केवल पूंजीपतियों के हितों में काम कर रही है।
विधायक चाचणा ने कहा कि पुलिस प्रशासन ने किसानों को डराने और फैक्ट्री का काम शुरू कराने के लिए बर्बर तरीके अपनाए। उन्होंने बताया कि किसानों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी कराई जा रही है, जबकि क्षेत्र के किसान वर्षों से इस फैक्ट्री का विरोध कर रहे हैं। विधायक ने कहा, “सरकार लाठी और गोली के माध्यम से किसानों को दबाना चाहती है, लेकिन क्षेत्र का किसान अपने हितों पर किसी भी प्रकार का कुठाराघात सहन नहीं करेगा।”
चाचणा ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन ने जनप्रतिनिधियों के साथ भी अनुचित व्यवहार किया। उन्होंने उल्लेख किया कि गुरुवार को विधायक रुबी कुर्नर को किसानों से मिलने से रोक दिया गया और उन्हें गिरफ्तार किया गया। इसी दौरान संगरिया विधायक पर भी लाठीचार्ज किया गया। उन्होंने कहा कि यह सब साबित करता है कि सरकार किसानों पर दवाब बनाने के लिए झूठे मुकदमे दर्ज कर रही है।
विधायक ने कृषि से जुड़ी समस्याओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सर्दी के इस मौसम में किसान डीएपी के लिए कतारों में खड़े हैं, नहरों में पानी न होने के कारण फसलें बर्बाद हो रही हैं, और अनाज मंडियों में कई दिनों से रखी गेहूं जैसी फसलें बिक नहीं रही। एमएसपी पर जिंसों की खरीद का सरकार का दावा भी पूरी तरह विफल हो चुका है।
अमित चाचणा ने कहा कि भाजपा केवल चुनावों के समय किसानों को याद करती है, सत्ता में आने के बाद उनकी समस्याओं को लेकर कोई ध्यान नहीं देती। उनका यह भी कहना था कि सरकार का उद्देश्य केवल किसानी को कमजोर करना और पूंजीपतियों को मजबूत करना है।
इस विवाद ने नोहर और आसपास के क्षेत्रों में किसान और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति पैदा कर दी है। स्थानीय किसानों का कहना है कि वे अपनी फसलों और अधिकारों की सुरक्षा के लिए संकल्पित हैं और किसी भी दबाव में नहीं आएंगे।

Pratahkal Bureau
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