नोहर क्षेत्र में सर्दी के तीखे तेवर और न्यूनतम तापमान के लगातार गिरने के बीच किसानों की चिंता बढ़ गई है। मौसम विभाग के संकेतों के अनुसार जब न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, उत्तर दिशा से ठंडी हवाएं चलने लगती हैं और आसमान साफ रहता है, तब पाले का गंभीर खतरा उत्पन्न हो जाता है। ऐसे हालात में जिले की रबी फसलों को भारी नुकसान की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क रहने और समय रहते आवश्यक बचाव उपाय अपनाने की अपील की है।

संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार), हनुमानगढ़ डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि पाले का सीधा असर सरसों, गेहूं, चना, आलू, मटर सहित कई संवेदनशील फसलों पर पड़ता है। पाले से फसलों की कोशिकाएं जम जाती हैं, जिससे पौधों की बढ़वार रुक जाती है और उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे में वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पाले की संभावना वाले दिनों में खेतों में हल्की सिंचाई करना अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है। नमी युक्त भूमि देर तक गर्मी संजोकर रखती है, जिससे तापमान अचानक नहीं गिरता। वैज्ञानिक अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि सर्दी के मौसम में सिंचाई करने से खेत का तापमान लगभग 0.5 से 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है, जिससे शीत लहर और पाले का प्रभाव कम होता है।

इसके साथ ही, फसलों पर घुलनशील गंधक अथवा गंधक के तेजाब का वैज्ञानिक मात्रा में छिड़काव करने से पाले से सुरक्षा मिलती है। यह छिड़काव न केवल पाले के प्रभाव को कम करता है, बल्कि पौधों में लौह तत्व की जैविक और रासायनिक सक्रियता को भी बढ़ाता है। इससे फसलों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और फसल जल्दी पकने में सहायता मिलती है। छिड़काव का असर लगभग दो सप्ताह तक बना रहता है और आवश्यकता पड़ने पर इसे निर्धारित अंतराल पर दोहराया जा सकता है।

डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि नर्सरी, पौधशालाओं और सीमित क्षेत्र में उगाई जा रही सब्जी फसलों के लिए विशेष सावधानी जरूरी है। ऐसे क्षेत्रों में रात के समय फसलों को टाट, पॉलिथीन या भूसे से ढककर भूमि के तापमान को गिरने से रोका जा सकता है। ठंडी हवा की दिशा को ध्यान में रखते हुए उत्तर-पश्चिम दिशा में वायुरोधी टाटियां लगाना भी प्रभावी उपाय है, जिन्हें दिन में हटाया जा सकता है।

दीर्घकालीन समाधान के रूप में कृषि विभाग ने खेतों की उत्तर-पश्चिमी मेड़ों पर वायु अवरोधक पेड़ों के रोपण की भी सलाह दी है। शहतूत, शीशम, बबूल, खेजड़ी, अरडू और जामुन जैसे पेड़ ठंडी हवाओं की तीव्रता को कम कर फसलों को पाले से प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करते हैं।

कृषि विभाग की यह एडवाइजरी नोहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। समय रहते इन उपायों को अपनाकर किसान अपनी मेहनत की फसल को पाले की मार से बचा सकते हैं और संभावित आर्थिक नुकसान को कम कर सकते हैं।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story