नोहर क्षेत्र के फेफाना से रतनपुरा हेड तक 14 मोरियों को लॉक करने की संभावित प्रशासनिक कार्रवाई ने क्षेत्र के किसानों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। सिंचाई व्यवस्था ठप होने और खेतों के बर्बादी की कगार पर पहुंचने की आशंका के बीच किसानों ने सोमवार को उपखंड अधिकारी (एसडीएम) को ज्ञापन सौंपकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। किसानों का स्पष्ट कहना है कि यदि प्रशासन ने मोरियों को बंद करने का निर्णय वापस नहीं लिया, तो क्षेत्र में व्यापक जन-आंदोलन का बिगुल फूंका जाएगा।

पंचायत समिति की पूर्व प्रधान उर्मिला बिजारणियां के नेतृत्व में एकजुट हुए ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उनके हिस्से का पानी पहले ही अवैध रूप से हरियाणा की ओर जा रहा है, जिससे इलाके में जल संकट गहरा गया है। ऐसी विषम परिस्थितियों में मोरियों को लॉक करना किसानों के लिए दोहरी मार के समान होगा। किसानों ने प्रशासन के समक्ष प्रमुख मांग रखते हुए कहा कि सिंचाई व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए हरियाणा से 332 क्यूसेक पानी लाने के ठोस प्रयास किए जाएं। ज्ञापन के माध्यम से चेतावनी दी गई है कि पूर्ण जलापूर्ति सुनिश्चित होने से पहले यदि मोरियों पर ताले लगाए गए, तो फेफाना, रतनपुरा, चारणवासी, चक 9 केएम, 10-12 चक सहित दर्जनों गांवों के ग्रामीण सड़कों पर उतरेंगे।

आंदोलन की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए किसानों ने घोषणा की है कि वे मोरियों पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। इस अवसर पर बशीलाल, दोलतराम, सोहनलाल, भालाराम, मोहनलाल, संदीप, देवीराम, संतलाल और हरिराम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। प्रशासन को सौंपे गए इस अल्टीमेटम ने स्पष्ट कर दिया है कि किसान अपने हक के पानी के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं, जिससे आने वाले दिनों में नोहर क्षेत्र में बड़ा गतिरोध पैदा होने के संकेत मिल रहे हैं।

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