नोहर, 22 दिसंबर। क्षेत्र के कई गांवों से अवैध रूप से कटे पेड़ों का मामला फिर से सुर्खियों में है। एनएचआर नहर के किनारे स्थित शीशम के पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में वन विभाग की कार्रवाई को लेकर विवाद उभर गया है। जानकारी के अनुसार, वन विभाग द्वारा जब्त किए गए पेड़ों में शीशम की बजाय अरडू की लकड़ी दिखाई गई, जिससे स्थानीय किसान और ग्रामीण आक्रोशित हैं।

क्षेत्र के किसान जीतराम जाट ने इस मामले को लेकर जिला कलेक्टर को पत्र लिखा और पूरी तरह से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनके पत्र में आरोप लगाया गया है कि जिन जगहों पर शीशम के पेड़ कटे और जब्त होने थे, वहां वन विभाग ने अरडू के पेड़ की लकड़ी दिखाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी करने का दावा किया।

घटना स्थल के अनुसार, 7-9 आरपीएम पिचकराई के पास नहर के समीप खुले आम इलेक्ट्रॉनिक कटर से दो दर्जन से अधिक शीशम के पेड़ काटे गए थे। बाद में वन विभाग ने हरियाणा से लकड़ी की जब्ती की। आरोप है कि इस कार्रवाई में वास्तविक अवैध कटाई करने वाले वन माफिया को बचाने के लिए केवल नाममात्र की लकड़ी जब्त दिखाई गई।

पत्र में यह भी बताया गया कि वन माफिया न केवल पेड़ काट रहे हैं, बल्कि नहर और उसके पट्टड़ों को तोड़कर सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। हरियाणा बॉर्डर के नजदीक होने के कारण अवैध कटाई की घटनाएँ रातोंरात होती हैं। जाट ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर मुख्य दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

इस मामले की शिकायत पत्र की प्रति वन मंत्री सहित उच्च अधिकारियों को भी भेजी गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि स्थानीय स्तर पर वन विभाग की लापरवाही और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण की आवश्यकता कितनी गंभीर है।

Pratahkal Newsroom

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