हनुमानगढ़: गेहूं खरीद को लेकर प्रशासन की बड़ी तैयारी, 2585 रुपये एमएसपी के साथ बायोमैट्रिक सत्यापन अनिवार्य
हनुमानगढ़ कलेक्ट्रेट में एडीएम उम्मेदी लाल मीना की अध्यक्षता में गेहूं खरीद 2026-27 को लेकर अहम बैठक संपन्न हुई। इस वर्ष 2585 रुपये एमएसपी और बायोमैट्रिक सत्यापन के जरिए पारदर्शी खरीद का लक्ष्य रखा गया है। लेख में पिछले वर्ष के आंकड़ों, नए नियमों, टेंडर प्रक्रिया और किसानों के लिए मंडी व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी शामिल है। जानिए कैसे तकनीक से रुकेगी धांधली और किसानों को मिलेगा सही दाम।

हनुमानगढ़, 1 जनवरी। सीमावर्ती जिले हनुमानगढ़ में अन्नदाता की उपज के दाने-दाने की सुरक्षा और पारदर्शी खरीद सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। नए साल के पहले ही दिन कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में गेहूं खरीद प्रक्रिया को लेकर भविष्य की रूपरेखा तैयार की गई। अतिरिक्त जिला कलेक्टर श्री उम्मेदी लाल मीना की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया कि इस बार खरीद प्रक्रिया न केवल तकनीकी रूप से उन्नत होगी, बल्कि किसानों की सहूलियत का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।
बैठक के दौरान जिला रसद अधिकारी (डीएसओ) श्री सुनील घोड़ेला ने बीते सत्र की उपलब्धियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हुए आगामी योजना पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान जिले के 58 क्रय केंद्रों ने मील का पत्थर स्थापित करते हुए 46,718 किसानों से 8.62 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की थी, जिसके बदले किसानों के खातों में 2219 करोड़ रुपये की विशाल राशि का भुगतान किया गया। पिछले वर्ष एमएसपी 2425 रुपये थी, जिसमें राज्य सरकार के 150 रुपये के बोनस ने किसानों को 2575 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ पहुंचाया था।
वर्तमान सत्र 2026-27 के लिए सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को बढ़ाकर 2585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। हालांकि बोनस पर अभी निर्णय शेष है, लेकिन जिले में 2,39,300 हेक्टेयर में लहलहाती गेहूं की फसल बंपर पैदावार की उम्मीद जगा रही है। इस वर्ष की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति बायोमैट्रिक सत्यापन के रूप में सामने आएगी। एडीएम श्री उम्मेदी लाल मीना ने कड़े निर्देश दिए हैं कि इस बार जन आधार के माध्यम से किसानों का बायोमैट्रिक सत्यापन किया जाएगा, जो पंजीकरण के बजाय वास्तविक खरीद के समय होगा। यह कदम बिचौलियों की भूमिका को समाप्त कर वास्तविक किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए उठाया गया है।
प्रशासनिक स्तर पर कड़े तेवर दिखाते हुए एडीएम ने भारतीय खाद्य निगम के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे टेंडर प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी न करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि निविदा शर्तों में समयबद्धता को प्राथमिकता दी जाए और लापरवाही बरतने वाली एजेंसियों पर भारी पेनल्टी लगाने के प्रावधान शामिल किए जाएं। मजदूरों की उपलब्धता, गेहूं का उठाव और गोदामों के साथ अनुबंध जैसी औपचारिकताएं समय रहते पूरी करने के आदेश दिए गए हैं ताकि मंडियों में अनाज का अंबार न लगे।
किसानों के कल्याण को केंद्र में रखते हुए मंडियों की सूरत सुधारने पर भी विशेष बल दिया गया। सभी खरीद केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी, शुद्ध पेयजल, कूलर, पंखे और किसान सहायता केंद्रों की चाक-चौबंद व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि सभी अधिकारी और कर्मचारी पहचान पत्र पहनें और केवल योग्य एवं प्रशिक्षित क्वालिटी इंस्पेक्टर ही फसल की गुणवत्ता परखें। मीटर संचालन के लिए भी अधिकृत ऑपरेटरों की ही तैनाती सुनिश्चित की जाएगी।
बैठक में एफसीआई प्रबंधक श्री विकास काले, प्रबंधक (भंडारण) श्री महेश कुमार सैनी, जीएम श्री सुखविन्द्र सिंह, कृषि संयुक्त निदेशक डॉ. प्रमोद कुमार, कृषि विपणन उपनिदेशक श्री विष्णु दत्त शर्मा और सहकारिता उप-रजिस्ट्रार श्री अमिलाल सहारण सहित विभिन्न विभागों के आला अधिकारी मौजूद रहे। खरीद एजेंसियों ने अपनी चुनौतियां भी प्रशासन के समक्ष रखीं, जिनका मौके पर ही समाधान निकालने का आश्वासन दिया गया। प्रशासन की यह मुस्तैदी संकेत दे रही है कि हनुमानगढ़ में इस बार गेहूं की खरीद एक सुव्यवस्थित उत्सव की तरह संपन्न होगी, जहां तकनीक और संवेदनशीलता का अनूठा मेल देखने को मिलेगा।

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