नोहर, 9 दिसंबर। जायका प्रोजेक्ट और मुख्यमंत्री बजट घोषणाओं के तहत सिद्धमुख सिंचाई प्रणाली, नोहर की नहरों, वितरिकाओं और माइनरों के सुदृढ़ीकरण का कार्य शुरू किया गया है। रसलाना वितरिका नहर के जीर्णोद्धार हेतु जल संसाधन खंड, नोहर द्वारा कार्य आदेश जारी किए जा चुके हैं।

हालांकि, नहर के 40 से 54 किलोमीटर तक के पटड़ों से पेड़-पौधों को हटाने के लिए वन विभाग द्वारा आवश्यक स्वीकृति नहीं दी जा रही है। इसके कारण जीर्णोद्धार का कार्य बाधित हो गया है, जिससे रसलाना वितरिका नहर और माइनरों के टेल के किसानों को पानी मिलने की उम्मीदें अधर में लटक गई हैं।

किसानों और किसान संगठनों का आरोप है कि जबकि राज्य सरकार अपनी दो वर्ष की उपलब्धियों का जश्न मनाने और जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित करने में व्यस्त है, वही वन विभाग मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत शुरू होने वाले इस महत्वपूर्ण कार्य में रोड़ा अटका रहा है। यह परियोजना आंदोलनरत किसानों की लंबित मांगों को पूरा करते हुए दर्जनों गांवों की प्यास बुझाने और हजारों हेक्टेयर भूमि को सिंचित करने में अहम भूमिका निभाने वाली थी।

विदित रहे कि टेल के किसान नहरों और वितरिकाओं के जीर्णोद्धार और पटड़ों के सुदृढ़ीकरण के साथ टेल पर पानी पहुँचाने की मांग को लेकर पिछले दो दशकों से आंदोलनरत हैं। इस संदर्भ में प्रभावित किसानों ने जिला कलेक्टर और अतिरिक्त जिला कलेक्टर से लिखित में स्वीकृति दिलवाने की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि दो दिन के भीतर स्वीकृति नहीं मिली, तो वे जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से मिलकर पुनः पुरजोर प्रदर्शन करेंगे।

इस विवाद से स्पष्ट होता है कि वन विभाग की हठधर्मिता और प्रशासनिक देरी सीधे किसानों की सिंचाई सुविधाओं और उनके कृषि जीवन पर प्रभाव डाल रही है। परियोजना की स्थगित प्रगति ने क्षेत्रीय किसानों और ग्रामीण समुदायों में व्यापक चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया है।

Pratahkal Bureau

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