हनुमानगढ़, 16 दिसंबर। जिले में कृषि नवाचारों और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत आत्मा परियोजना के अंतर्गत मंगलवार को आत्मा परियोजना कार्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में एक दिवसीय कृषक–वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम ने किसानों और वैज्ञानिकों को एक साझा मंच पर लाकर आधुनिक कृषि तकनीकों, अनुसंधान और सरकारी योजनाओं की जानकारी को सीधे खेतों तक पहुँचाने का सशक्त प्रयास किया। जिले के 62 प्रगतिशील किसानों की सक्रिय भागीदारी ने इस संवाद को जीवंत और प्रभावशाली बना दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता उप निदेशक कृषि एवं पदेन परियोजना निदेशक आत्मा डॉ. सुभाष चंद्र डूडी ने की। उन्होंने किसानों का स्वागत करते हुए कहा कि कृषक–वैज्ञानिक संवाद खेती को लाभकारी बनाने का एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए बीमा को अनिवार्य बताया और किसानों से समय पर पंजीकरण कराने का आग्रह किया।

कृषि अनुसंधान केंद्र, श्रीगंगानगर के क्षेत्रीय अनुसंधान निदेशक डॉ. ए.के. शर्मा ने कार्यक्रम में विशेष सहभागिता की। उन्होंने कृषि क्षेत्र में हो रहे नवीनतम अनुसंधान और तकनीकी नवाचारों पर प्रकाश डालते हुए रबी सीजन में गेहूं की विभिन्न उन्नत किस्मों पर चल रहे शोध की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को स्वयं बीज उत्पादन अपनाने के लिए प्रेरित किया, जिससे उत्पादन लागत कम होने के साथ-साथ गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जा सके।

केवीके संगरिया के विषय विशेषज्ञ डॉ. उमेश कुमार ने पौध संरक्षण और प्राकृतिक खेती के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। वहीं, सेवानिवृत्त उप निदेशक कृषि श्री जयनारायण बेनीवाल ने किसानों से बदलते कृषि परिदृश्य के अनुरूप नवाचारों को अपनाने और आधुनिक तकनीकों से जुड़ने का आह्वान किया। मृदा परीक्षण प्रयोगशाला, हनुमानगढ़ के सहायक कृषि अनुसंधान अधिकारी श्री अभिषेक गोदारा ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और मृदा उर्वरता सुधार की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।

उद्यान विभाग से डॉ. रमेश चंद्र बराला ने शस्य फसलों के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाने को अतिरिक्त आय का सशक्त माध्यम बताया। कृषि अनुसंधान अधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने सरसों और चना फसलों में समसामयिक कृषि क्रियाओं की जानकारी दी, जबकि डॉ. राधेश्याम सिहाग ने गेहूं की फसल में खरपतवार नियंत्रण और पोषक तत्व प्रबंधन पर व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया। वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. भंवर लाल शर्मा ने पशुपालन के वैज्ञानिक प्रबंधन और विभागीय योजनाओं की जानकारी साझा की, जिससे मिश्रित खेती को बढ़ावा मिल सके।

कार्यक्रम में उप परियोजना निदेशक आत्मा करणजीत सिंह ने आत्मा योजनांतर्गत संचालित कृषक प्रशिक्षण, अध्ययन भ्रमण और कृषक पुरस्कार योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों को इनका लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर कृषि अनुसंधान अधिकारी श्री राजेन्द्र बेनीवाल, सहायक निदेशक कृषि मुख्यालय श्री बलकरण सिंह सहित कृषि विभाग के अनेक अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

कृषक–वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम ने यह स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक मार्गदर्शन, सरकारी योजनाओं और किसानों की सक्रिय सहभागिता के माध्यम से कृषि को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और भविष्य के अनुरूप बनाया जा सकता है। यह आयोजन जिले में कृषि विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है।

Pratahkal Bureau

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