सिद्धमुख सिंचाई प्रणाली में मोघों/आउटलेट्स लॉक न होने से टेल पर पानी नहीं पहुँच पा रहा, किसानों ने उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा
नोहर की सिद्धमुख सिंचाई प्रणाली में मोघों और आउटलेट्स लॉक न होने के कारण टेल पर पानी नहीं पहुँच पा रहा। किसानों ने उपखंड अधिकारी को ज्ञापन देकर न्यायालय के आदेश के अनुसार समान जल वितरण सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि टेल क्षेत्र में पर्याप्त पानी मिल सके।

नोहर, 3 दिसंबर। रासलाना वितरिका नहर के टेल क्षेत्र के किसानों ने सिद्धमुख सिंचाई प्रणाली, नोहर में गंभीर जल वितरण समस्या को लेकर बुधवार को उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। किसानों ने बताया कि नोहर की यह परियोजना राजस्थान की तीसरी सबसे बड़ी सिंचाई प्रणाली है, लेकिन मोघों और आउटलेट्स को लॉक करने का कोई ठोस सिस्टम न होने के कारण टेल पर पर्याप्त पानी नहीं पहुँच पाता।
किसानों ने उपखंड अधिकारी को बताया कि सिद्धमुख फीडर नहर सीपी 5 प्वाइंट से भादरा तहसील क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद भादरा, राजगढ़/सादुलपुर और नोहर तहसील क्षेत्र को A, B, C तीन ग्रुपों में विभाजित कर रेगुलेशन के अनुसार पानी वितरित करता है। सामान्य परिस्थितियों में जब किसी एक ग्रुप को पानी मिलता है, तो अन्य दो ग्रुपों में पानी बंद रहता है। लेकिन नोहर तहसील क्षेत्र के टेल तक पहुंचने वाले सी ग्रुप रेगुलेशन के दौरान भी A और B ग्रुप के 1 से 24 किमी तक के सिद्धमुख फीडर नहर और रासलाना वितरिका RD 1 से 40 किमी तक के मोघे/आउटलेट्स में पानी चला जाता है, क्योंकि इन्हें लॉक करने का कोई प्रणाली मौजूद नहीं है।
किसानों ने अवैध आउटलेट्स की समस्या भी उजागर की। उनका कहना है कि इन अवैध मोघों में भी पानी निरंतर चलता रहता है, जो जल संसाधन विभाग की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने उच्च न्यायालय, जोधपुर द्वारा जारी आदेश का हवाला देते हुए कहा कि किसानों को संबंधित रेगुलेशन ग्रुप के अनुसार समान रूप से पानी वितरण सुनिश्चित करने के लिए मोघों और आउटलेट्स को लॉक करना आवश्यक है।
किसानों ने उपखंड अधिकारी से आग्रह किया कि A और B ग्रुप के दौरान चलने वाले वैध एवं अवैध मोघों/आउटलेट्स को सी ग्रुप रेगुलेशन के समय रोका जाए, ताकि न्यायालय के आदेश की अवमानना न हो और टेल पर पर्याप्त पानी पहुँच सके। ज्ञापन में किसानों की ओर से विनोद जांगिड़, कृष्ण सहारण, एडवोकेट हंसराज बेनीवाल और राजकुमार सुथार ने हस्ताक्षर किए।
किसानों का कहना है कि यदि जल वितरण में सुधार नहीं हुआ और न्यायालय के आदेश की पालना सुनिश्चित नहीं हुई, तो उन्हें मजबूरन पुनः उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।
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Pratahkal Bureau
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