हनुमानगढ़, 29 दिसंबर। सामाजिक न्याय और संवैधानिक समानता की भावना को केंद्र में रखते हुए राजस्थान अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनैतिक प्रतिनिधित्व) आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) श्री मदनलाल भाटी ने सोमवार को हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय पर आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर व्यापक और सार्थक संवाद किया। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित इस परिचर्चा में नगरीय निकायों एवं पंचायती राज संस्थाओं से जुड़े जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने खुलकर अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम की जानकारी देते हुए राजस्थान ओबीसी आयोग के जनसंपर्क अधिकारी श्री विक्रम राठौड़ ने बताया कि यह जनसंवाद आयोग की उस प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके तहत राज्यभर में ओबीसी वर्ग से जुड़े क्षेत्रीय मुद्दों, सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों, विकास संबंधी आवश्यकताओं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की वास्तविक स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन किया जा रहा है। आयोग अध्यक्ष श्री मदनलाल भाटी ने स्पष्ट किया कि इस संवाद का उद्देश्य तथ्यात्मक और अनुभवजन्य आधार पर एक समग्र रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को प्रस्तुत करना है, ताकि पंचायती राज एवं नगरीय निकायों में ओबीसी वर्ग के लिए न्यायसंगत राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।

अपने संबोधन में श्री भाटी ने न्याय की अवधारणा को मानवीय दृष्टिकोण से रेखांकित करते हुए कहा कि यदि न्याय मिलने में देरी होती है तो वह न्याय नहीं, बल्कि अन्याय बन जाता है। उन्होंने कहा कि मजलूम को उसका न्याय उसके दर्द के समाप्त होने से पहले और मजदूर को उसकी मजदूरी पसीना सूखने से पहले मिलनी चाहिए। उन्होंने आश्वस्त किया कि आयोग वास्तव में वंचित वर्गों की पहचान कर उनकी स्थिति पर सटीक और निष्पक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। संविधान में निहित समानता के मूलभूत अधिकारों की पूर्ण पालना के प्रति आयोग की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि ओबीसी वर्ग की जिन जातियों का प्रतिनिधित्व कम है, उनके संबंध में प्राप्त सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

आयोग अध्यक्ष ने इसे एक खुला मंच बताते हुए सभी प्रतिभागियों को अपने विचार निर्भीक होकर रखने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अनुपालना में आयोग को ग्रामीण एवं शहरी स्थानीय निकायों में ओबीसी वर्ग के पिछड़ेपन की प्रकृति, उसकी तीव्रता और उसके प्रभावों का समसामयिक अध्ययन करना है। इसी अध्ययन के आधार पर आयोग को पंचायतों और नगर निकायों के चुनावों में ओबीसी आरक्षण को लेकर समयबद्ध अनुशंसाएं राज्य सरकार को सौंपनी हैं। उनका कहना था कि आयोग का मूल उद्देश्य राजस्थान में सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के समुचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करना है।

खुली परिचर्चा के दौरान हनुमानगढ़ विधायक श्री गणेशराज बंसल ने नगरीय निकायों एवं पंचायती राज संस्थाओं में मूल पिछड़ा वर्ग के नगण्य प्रतिनिधित्व पर चिंता जताई। उन्होंने आयोग से आग्रह किया कि पिछड़ा, मध्य पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग के रूप में वर्गीकरण कर आंकड़े एकत्र किए जाएं, ताकि वास्तविक रूप से वंचित वर्गों को उनका अधिकार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल सके। उन्होंने कहा कि वंचित वर्गों की पीड़ा को समझना और उन्हें उनका हक दिलाना समय की आवश्यकता है।

जनसंवाद के दौरान स्वामी समाज, कुम्हार समाज, भाट समाज, मरासी समाज सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने आयोग अध्यक्ष के समक्ष अपने विचार रखे और ज्ञापन प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में पंचायती राज और नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों के साथ अतिरिक्त जिला कलक्टर श्री उम्मेदी लाल मीना, एसीईओ श्री देशराज बिश्नोई, आर्थिक एवं सांख्यिकी सहायक निदेशक श्रीमती ममता बिश्नोई, नगरपरिषद आयुक्त श्री सुरेन्द्र यादव, भाजपा जिलाध्यक्ष श्री प्रमोद डेलू, जनप्रतिनिधि श्री बलवीर बिश्नोई तथा विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

हनुमानगढ़ में आयोजित यह जनसंवाद कार्यक्रम ओबीसी वर्ग के राजनीतिक अधिकारों को लेकर न केवल एक गंभीर विमर्श का मंच बना, बल्कि यह संकेत भी दिया कि जमीनी सच्चाइयों के आधार पर नीतिगत निर्णयों की दिशा में एक ठोस पहल की जा रही है, जिसका प्रभाव भविष्य की स्थानीय स्वशासन व्यवस्था पर दूरगामी हो सकता है।

Pratahkal Bureau

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