नोहर, 10 दिसंबर। राजस्थानी लोक संस्थान के अंतर्गत संचालित होराइजन दिव्यांग जागरूकता, शिक्षा एवं पुनर्वास केंद्र में बुधवार को विश्व मानवाधिकार दिवस धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में दिव्यांग बच्चों ने अपनी प्रतिभा और कौशल का शानदार प्रदर्शन करते हुए उपस्थित अतिथियों और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दिव्यांग जन कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रयागचंद मोयल थे, जबकि अध्यक्षता परलीका के किसान दलीप बेनीवाल ने की। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में दिव्यांग प्रतिनिधि भाल सिंह और गुगनराम सिहाग उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि प्रयागचंद मोयल ने कहा कि मानवाधिकार समान अवसरों का अधिकार हैं और दिव्यांग बच्चों के जीवन में संवेदनात्मक सहयोग तथा विशेष प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने होराइजन द्वारा संचालित गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्था बच्चों के आत्मविश्वास और भविष्य निर्माण में अहम भूमिका निभा रही है।

अध्यक्ष दलीप बेनीवाल ने कहा कि समाज में समानता, सम्मान और संवेदना ही वास्तविक मानवाधिकार की नींव हैं। उन्होंने होराइजन की उस पहल की भी सराहना की, जिसके माध्यम से दिव्यांग बच्चों को शिक्षा, कला और कौशल विकास से जोड़ा जा रहा है।

कार्यक्रम में बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शानदार झलक पेश की। दिव्या, अरमान, अमनदीप, जिज्ञासा, सचित, उमेश, पीयुष, माधव, सुफियान, रीजा, अनुराधा और कुनाल ने राजस्थानी, पंजाबी और अन्य लोकगीतों पर नृत्य और सामूहिक प्रस्तुतियां दीं। उनके माता-पिता, जिनमें विकास कुमार, हमीदा, सुभाष शर्मा, सतवीर सोनी, हरीश सोनी, शिवनारायण, पूजा, संजीव, ममता रानी, असलम, नीरु पड़ा, सुमन, महेंद्र, सरोज कुमारी और बादल सिंधी शामिल थे, ने बच्चों की प्रगति के अनुभव साझा किए और संस्था के प्रयासों की सराहना की।

विशेष शिक्षक नरेश नुईयां, रविन्द्र कुमार, मनप्रीत सिंह और लक्ष्मी कुमारी ने बच्चों के व्यवहार, संज्ञानात्मक विकास, भाषा कौशल एवं थैरेपी प्रगति की विस्तृत जानकारी प्रदान की। संस्थान के अध्यक्ष डॉ. भरत ओला ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि मानवाधिकार केवल कानूनी शब्द नहीं, बल्कि जीवन का आधार हैं। उन्होंने बताया कि होराइजन का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को आत्मसम्मान और सुरक्षित अवसर प्रदान करना है।

कार्यक्रम के समापन पर संस्थान के कोषाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण कस्वां ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर वेदप्रकाश सहारण, रामेश्वर सहारण, हरि सिंह सहू और रमेश जांगिड़ सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल मानवाधिकार की चेतना फैलाने का माध्यम बना, बल्कि दिव्यांग बच्चों की प्रतिभा और उनके आत्मविश्वास को प्रदर्शित करने का भी अवसर प्रदान किया।

Pratahkal Bureau

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