लोकसभा में चूरू सांसद राहुल कस्वां का गंभीर सवाल: किसानों के शरीर में घुल रहा जहर, कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग पर उठी कड़ी कार्रवाई की मांग
लोकसभा में चूरू सांसद राहुल कस्वां ने राजस्थान सहित देशभर में फसलों पर अत्यधिक कीटनाशकों के उपयोग से किसानों के रक्त में खतरनाक रसायनों की उपस्थिति और कैंसर जैसे गंभीर रोगों के बढ़ते खतरे पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्वास्थ्य सर्वेक्षण, नई SOP, जैविक विकल्प और सुरक्षित कृषि नीति की तत्काल मांग की।

नोहर, 10 दिसंबर। लोकसभा में आज वह मुद्दा गूंजा जिसने न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश की कृषि व्यवस्था पर चिंता की मोटी लकीर खींच दी। चूरू सांसद राहुल कस्वां ने नियम-377 के तहत फसलों में अत्यधिक कीटनाशकों के उपयोग से किसानों और आमजन के स्वास्थ्य पर पड़ रहे भयावह प्रभाव का मामला उठाते हुए सरकार से तुरंत ठोस कदम उठाने की मांग की।
सांसद कस्वां ने कहा कि राजस्थान के मरु-क्षेत्रों में फसलों पर बढ़ते रासायनिक प्रयोग अब सीधे किसानों के शरीर में जहर घोल रहे हैं। हाल ही में कराए गए परीक्षणों में यह तथ्य सामने आया कि 19 किसानों के रक्त में ऑर्गेनोफॉस्फेट, प्रायथ्रॉइड और ग्लाइफोसेट जैसे अत्यंत खतरनाक रासायनिक तत्व पाए गए हैं। ये वही तत्व हैं जो कैंसर, तंत्रिका तंत्र की क्षति, हार्मोन असंतुलन और दीर्घकालीन स्वास्थ्य समस्याओं के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं।
उन्होंने कहा कि अधिक उत्पादन की दौड़ में किसान अनजाने में प्रतिबंधित या उच्च-हानिकारक रसायनों का उपयोग कर रहे हैं, जिसका असर मिट्टी, पानी और पर्यावरण पर तो पड़ ही रहा है, लेकिन अब यह मानव शरीर में भी दर्ज हो रहा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि खेतों में होने वाली रासायनिक स्प्रे की मात्रा अब किसानों की सेहत को सीधा नुकसान पहुंचा रही है और खाद्यान्न भी स्वास्थ्य के लिए खतरा बनता जा रहा है।
कस्वां ने सरकार को चेताते हुए कहा कि यह केवल कृषि संकट नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए एक उभरता राष्ट्रीय खतरा है, जिसे तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि राज्य सरकारों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य सर्वेक्षण शिविर आयोजित किए जाएं, जिनमें किसानों की विस्तृत जांच हो और गंभीर बीमारी के संकेत मिलने पर उनका समुचित उपचार सुनिश्चित किया जाए।
संसद में उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि बेतहाशा कीटनाशक उपयोग पर नई SOP जारी की जाए, जैविक और सुरक्षित कीटनाशक विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए नीति तैयार की जाए, तथा सुरक्षित कृषि और IPM के लिए विशेष पैकेज घोषित किया जाए। साथ ही किसानों को सीमित एवं सुरक्षित कीटनाशक उपयोग के लिए व्यापक स्तर पर जागरूक करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
कस्वां की यह पहल उन हजारों किसानों की आवाज बनकर उभरी है जो अपनी फसलों के साथ-साथ अनजाने में अपनी सेहत को भी दांव पर लगा रहे हैं। अब देश की नजर सरकार के उन कदमों पर होगी जो इस बढ़ते खतरे पर नियंत्रण के लिए उठाए जाते हैं।

Pratahkal Bureau
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