हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी कस्बे में मंगलवार को आयोजित महापंचायत न केवल भीड़ के लिहाज़ से ऐतिहासिक साबित हुई, बल्कि इलाके में निर्माणाधीन इथेनॉल फैक्ट्री के खिलाफ चल रहे आंदोलन को नई धार देकर निर्णायक मोड़ पर भी ले आई। मैदान इतना भर गया कि आसपास की गलियाँ भी लोगों से पटी नजर आईं। गांवों से पैदल, ट्रैक्टरों और सैकड़ों वाहनों में पहुंचे महिलाओं, पुरुषों और युवाओं की विशाल उपस्थिति ने आयोजनकर्ताओं को अभूतपूर्व उत्साह से भर दिया। गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी द्वारा किए गए विशाल लंगर प्रबंध ने भी इस जनसैलाब के पैमाने को और स्पष्ट कर दिया।

महापंचायत के विपरीत दिशा में पुलिस का कड़ा पहरा रहा। निर्माणाधीन प्लांट को सुरक्षा घेरे में लेकर बड़ी संख्या में जवान तैनात किए गए। प्रशासन ने तनावपूर्ण परिस्थितियों को देखते हुए इंटरनेट सेवाएं भी निलंबित कर दीं, जिससे हालात काबू में रखें जा सकें। हालांकि माहौल गर्म था, लेकिन भीड़ पूरी तरह अनुशासित रही और टकराव की आशंका के बावजूद व्यवस्था नियंत्रण में बनी रही।

सभा में फैक्ट्री हटाओ संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के साथ क्षेत्र के प्रमुख नेताओं ने जनता को संबोधित किया। विधायक अभिमन्यु पूनिया, पूर्व विधायक बलवान पूनिया, कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री शबनम गोदारा, किसान नेता मंगेज चौधरी, रवि जोसन और माकपा नेता रघुवीर वर्मा सहित कई वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि यह लड़ाई किसी समूह की नहीं, बल्कि पूरे इलाके की सामूहिक लड़ाई है। मंच से यह संदेश गूंजता रहा कि टिब्बी के किसान, महिलाएं, व्यापारी, युवा—सभी इथेनॉल फैक्ट्री के विरोध में एकजुट हैं।

रवि जोसन ने इस परियोजना को ‘जहरीला प्लांट’ बताते हुए दावा किया कि इससे क्षेत्र की हवा, पानी और जमीन गंभीर रूप से प्रदूषित होंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार और प्लांट संचालक इतने आश्वस्त हैं, तो जनता की शंकाओं का स्पष्ट जवाब देने से क्यों बच रहे हैं। उनका कहना था कि विकास जनता की सहमति और सुरक्षा के साथ होना चाहिए, न कि उनकी इच्छा के खिलाफ।

वक्ताओं ने दोहराया कि वे उद्योगों के विरोधी नहीं हैं। विकास और रोजगार की जरूरत सबको है, पर ऐसे उद्योग नहीं जो पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को खतरे में डाल दें। नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन पूंजीपति हितों को बचाने के लिए जनता की चिंताओं को नजरअंदाज कर रहा है। कई वक्ताओं ने यह भी कहा कि सरकार कब तक पुलिस बल के सहारे इस परियोजना को थोपने का प्रयास करती रहेगी।

महापंचायत के मद्देनजर प्रशासन ने भी पूरी तैयारी की थी। कस्बे में भारी पुलिस बल तैनात किया गया, एंट्री पॉइंट्स पर कड़ी निगरानी रखी गई और अधिकारियों-कर्मचारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गईं। भीड़ के अनुशासन ने प्रशासन को राहत दी, लेकिन ग्रामीणों के दृढ़ तेवर इस बात का स्पष्ट संकेत छोड़ गए कि इलाके की जनता इथेनॉल फैक्ट्री को किसी भी कीमत पर स्वीकार करने को तैयार नहीं है।

टिब्बी की यह महापंचायत न केवल विरोध की आवाज़ को और बुलंद कर गई, बल्कि आने वाले दिनों में इस संघर्ष के और तीखे होने के संकेत भी दे गई। इलाके का संदेश साफ है—विकास चाहिए, लेकिन जनता की कीमत पर नहीं।

Pratahkal Bureau

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