नोहर, 8 दिसंबर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सौ वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आचार्य तुलसी भवन नोहर में एक भव्य जन गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम का आयोजन उत्साह और गंभीरता दोनों के साथ हुआ, जिसमें राजस्थान क्षेत्र के बौद्धिक प्रमुख डॉ. श्रीकांत मुख्य वक्ता रहे। कार्यक्रम अध्यक्ष के रूप में भारत माता आश्रम के महंत रामनाथ अवधूत और शिवभगवान पारीक मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का आरंभ अतिथियों द्वारा मां भारती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और सामूहिक “वंदेमातरम” के साथ हुआ। महंत रामनाथ अवधूत ने संघ के सौ वर्ष की उपलब्धियों और सेवा कार्यों पर प्रकाश डालते हुए इसके सामाजिक और राष्ट्रीय महत्व पर चर्चा की। इसके पश्चात काव्य और गीत प्रस्तुत किए गए।

डॉ. श्रीकांत ने अपने संबोधन में संघ की रीति-नीति, व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण तक के संबंध, तथा पंच परिवर्तन सिद्धांतों का विस्तारपूर्वक विश्लेषण किया। उन्होंने बताया कि संघ सौ वर्षों की निरंतर साधना है, जिसमें राष्ट्रप्रथम की भावना सर्वोपरि रही है। हिंदुत्व को उन्होंने जीवनशैली के रूप में परिभाषित किया और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” एवं “वसुधैव कुटुम्बकम” के विचारों पर जोर दिया।





उन्होंने पारिवारिक और सामाजिक जीवन में संस्कार, स्वभाषा, सांस्कृतिक भ्रमण, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और नैतिक शिष्टाचार के महत्व पर भी प्रकाश डाला। डॉ. श्रीकांत ने कहा कि पंच परिवर्तन पहले व्यक्तिगत जीवन में अपनाए जाएँ और फिर समाज में लागू किए जाएँ। मातृशक्ति को सेवा, संपर्क और प्रचार में अग्रणी भूमिका निभाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने आयुर्वेद और नई शिक्षा नीति के महत्व को भी रेखांकित किया।

इस मौके पर जिला प्रचारक राधेश्याम, खंड कार्यवाह कमल शर्मा, नगर कार्यवाह रमेश पारीक, विस्तारक टीकूराम, हरिश्चंद्र शर्मा सहित संपूर्ण संघ टोली, नगर के प्रबुद्ध नागरिक, सामाजिक संगठन, शिक्षाविद और मातृशक्ति की उपस्थिति रही। कार्यक्रम ने स्थानीय समुदाय में सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक जागरूकता और संघ की विचारधारा के महत्व को उजागर किया।

Pratahkal Newsroom

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