मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान उत्तर भारत के किसानों की आय बढ़ाने और नई तकनीक पर साझा करेंगे रोडमैप।

Regional Agriculture Conference North Zone Lucknow : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ शुक्रवार को देश की कृषि नीति के नए केंद्र के रूप में उभरने जा रही है। केंद्रीय किसान कल्याण मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित होने वाला 'क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन (उत्तर जोन)' केवल एक बैठक नहीं, बल्कि उत्तर भारत के किसानों की तकदीर बदलने वाला एक महामंच साबित होगा। इस ऐतिहासिक सम्मेलन में उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सहित 9 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कृषि मंत्री, उद्यान मंत्री और शीर्ष वैज्ञानिक एक छत के नीचे जुटेंगे। आयोजन का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में नवाचार, आत्मनिर्भरता और किसानों की आय को दोगुना करने के रोडमैप पर मुहर लगाना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान इस उच्च स्तरीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे, जो उत्तर भारत के कृषि परिदृश्य में एक बड़े बदलाव का संकेत है।

सम्मेलन की तैयारियों और इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने लोकभवन में पत्रकारों को बताया कि यह आयोजन 'नॉलेज शेयरिंग' का एक बड़ा माध्यम बनेगा। जहाँ पंजाब सरकार धान के फसल विविधीकरण (Crop Diversification) की अपनी सफल पद्धति साझा करेगी, वहीं हिमाचल और उत्तराखंड के प्रतिनिधि बागवानी (Horticulture) के क्षेत्र में अपनाई गई विशेष पद्धतियों से अन्य राज्यों को अवगत कराएंगे। उत्तर प्रदेश इस मंच का उपयोग धान की सीधी बोआई (DSR) विधि और गन्ने के साथ इंटरक्रॉपिंग जैसी सर्वोत्तम पद्धतियों के प्रदर्शन के लिए करेगा। सम्मेलन के दौरान न केवल उन्नत खेती पर चर्चा होगी, बल्कि नकली कीटनाशकों और उर्वरकों की कालाबाजारी जैसे गंभीर मुद्दों पर भी नकेल कसने की रणनीति तैयार की जाएगी।

तकनीकी और आर्थिक पहलुओं को कवर करते हुए, इस महाबैठक में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), कृषि ऋण और 'एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड' की प्रगति की गहन समीक्षा की जाएगी। दलहन आत्मनिर्भरता मिशन और राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन जैसे महत्वपूर्ण एजेंडे इस चर्चा के केंद्र में होंगे, जो देश की आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। सरकार का विशेष ध्यान रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग और वैकल्पिक उर्वरकों को बढ़ावा देने पर है। कृषि मंत्री शाही ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में उर्वरक का पर्याप्त भंडार है और सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए 40 हजार कुंतल ढेंचे का बीज उपलब्ध करा रही है, जिससे यूरिया की खपत में 20 प्रतिशत तक की कमी आने का अनुमान है।


Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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