दीपावली पर बनाएं समृद्धि की पोटली, लक्ष्मी पूजन में 11 वस्तुओं का बताया गया विशेष महत्व
दीपावली पर 08 नवंबर को लक्ष्मी पूजन के साथ समृद्धि की पोटली बनाने की परंपरा निभाई जाएगी। जानिए बाबूलाल शास्त्री द्वारा बताई गई 11 विशेष वस्तुएं, पोटली तैयार करने की विधि, पूजा का तरीका और इसे रखने के शुभ स्थान।

दीपावली लक्ष्मी पूजन के अवसर पर भगवान गणेश, देवी लक्ष्मी और देवी सरस्वती की पूजा के साथ समृद्धि की पोटली स्थापित करने का धार्मिक महत्व है।
दीपावली महापर्व पर 08 नवंबर को लक्ष्मी पूजन के अवसर पर घर में सुख-समृद्धि और आर्थिक स्थिरता की कामना के साथ समृद्धि की पोटली बनाने की परंपरा निभाई जाएगी। धार्मिक एवं पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस पोटली को धन, सुख-समृद्धि, आर्थिक स्थिरता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धा और विधि-विधान से तैयार की गई इस पोटली को घर के पूजा स्थान पर रखने की परंपरा है।
मनु ज्योतिष एवं वास्तु शोध संस्थान टोंक के निदेशक बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि समृद्धि की पोटली में 11 विशेष वस्तुएं रखी जाती हैं। इनमें पीली कौड़ियां, लाल-सफेद और काली गुंजा, पंचमुखी रुद्राक्ष, कमल के बीज, छोटा नारियल, मौली में बंधी सुपारी, गोमती चक्र, मरौड़ शंख या मरौड़ फली, लक्ष्मी यंत्र, कुबेर यंत्र, सिक्के और पिरामिड नोट शामिल हैं।
पोटली में तीन से पांच पीली कौड़ियां रखी जाती हैं। प्राचीन मान्यताओं में कौड़ियों को धन और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। माता लक्ष्मी की पूजा में भी इनका विशेष महत्व बताया जाता है। पीली कौड़ियां धन-संपन्नता और शुभता की पारंपरिक प्रतीक मानी जाती हैं।
इसके साथ लाल, सफेद और काली गुंजा के तीन से पांच दाने प्रत्येक रंग के रखे जाते हैं। धार्मिक एवं तांत्रिक मान्यताओं में गुंजा के दानों का उल्लेख मिलता है और इन्हें पोटली में प्रतीकात्मक रूप से रखा जाता है। हालांकि, गुंजा के दाने जहरीले हो सकते हैं। इसलिए इन्हें मुंह में नहीं डालना चाहिए और बच्चों तथा पालतू जानवरों से दूर रखना चाहिए।
पोटली में एक पंचमुखी रुद्राक्ष भी रखा जाता है। रुद्राक्ष को भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है, जबकि पंचमुखी रुद्राक्ष आध्यात्मिक शांति, साधना और सकारात्मकता से जुड़ा हुआ है। कमल के तीन से पांच बीज भी इसमें रखे जाते हैं। कमल को माता लक्ष्मी का प्रिय पुष्प माना जाता है और इसके बीज सृजन, पवित्रता तथा समृद्धि के प्रतीक माने जाते हैं।
एक छोटा नारियल भी पोटली की सामग्री में शामिल होता है। नारियल को श्रीफल कहा जाता है। हिंदू धर्म में इसे शुभता, पूर्णता और मंगल कार्यों का प्रतीक माना गया है। पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में इसका विशेष महत्व है। इसी तरह एक सुपारी को लाल मौली से बांधकर रखा जाता है। पूजा में सुपारी को गणेश जी के प्रतीक के रूप में भी स्थापित किया जाता है। इसे मंगल कार्य और शुभ संकल्प का प्रतीक माना जाता है।
पोटली में तीन से पांच गोमती चक्र भी रखे जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गोमती चक्र को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी से संबंधित शुभ वस्तु माना जाता है। इसे घर में सुख-शांति और समृद्धि की कामना के साथ रखा जाता है। इसके अलावा एक मरौड़ शंख या मरौड़ फली भी शामिल की जाती है।
बाबूलाल शास्त्री के अनुसार पोटली में लक्ष्मी यंत्र और कुबेर यंत्र रखने की भी परंपरा है। माता लक्ष्मी को धन, वैभव और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है, जबकि भगवान कुबेर धन के अधिपति माने जाते हैं। इसलिए दोनों यंत्रों को पोटली में स्थान दिया जाता है। ये यंत्र स्वच्छ और पूजा योग्य होने चाहिए। इसके साथ कुछ साफ सिक्के रखे जाते हैं, जिन्हें धन और आर्थिक लेन-देन का प्रतीक माना जाता है। इन्हें आर्थिक स्थिरता और धन के सदुपयोग के संकल्प के साथ रखने की मान्यता है। पोटली में एक पिरामिड नोट भी रखा जाता है, जिसे पारंपरिक वास्तु एवं समृद्धि संबंधी मान्यताओं के अनुसार प्रतीकात्मक रूप से शामिल किया जाता है।
समृद्धि की पोटली तैयार करने के लिए सबसे पहले लाल या पीले रंग का साफ कपड़ा लें। इसे अच्छी तरह साफ करके पूजा के स्थान पर बिछाएं। लाल रंग को शक्ति, मंगल और शुभता का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद कपड़े के मध्य में एक लक्ष्मी यंत्र और एक कुबेर यंत्र रखें। इनके साथ पंचमुखी रुद्राक्ष और अन्य पूजा सामग्री व्यवस्थित करें। इसके बाद कौड़ियां, गुंजा, कमल के बीज, नारियल, मौली में बंधी सुपारी, गोमती चक्र, मरौड़ शंख या फली, सिक्के और पिरामिड नोट क्रम से रखें।
सभी वस्तुएं रखने के बाद लाल या पीले कपड़े के चारों कोनों को एक साथ लाकर पोटली का आकार दें। इसे लाल मौली या सुनहरे धागे से अच्छी तरह बांध दें। पोटली बांधते समय माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर का स्मरण करना चाहिए।
दीपावली के दिन शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा के साथ भगवान कुबेर का भी पूजन करें। इसके बाद समृद्धि की पोटली को पूजा स्थान पर रखकर धूप, दीप, पुष्प और अक्षत अर्पित करें। माता लक्ष्मी से घर में सुख, शांति, धन-धान्य और परिवार की उन्नति की प्रार्थना करें।
पूजा संपन्न होने के बाद पोटली को घर के मंदिर, अलमारी या तिजोरी में रखा जा सकता है। इसे पूजा के लिए निर्धारित किसी स्वच्छ और सुरक्षित स्थान पर भी रखा जा सकता है। पोटली बनाने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। अपनी पारिवारिक परंपरा और श्रद्धा के अनुसार इसकी सामग्री में बदलाव भी किया जा सकता है।
बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि पोटली बांधते समय माता लक्ष्मी का स्मरण करते हुए 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' मंत्र का जाप करना चाहिए। इसके साथ माता महालक्ष्मी से प्रार्थना करें कि घर में सुख, शांति, सद्बुद्धि, धन-धान्य और समृद्धि बनी रहे। परिवार के सभी सदस्यों को सद्कर्म करने की शक्ति मिले तथा जीवन से दरिद्रता, कलह और नकारात्मकता दूर हो।
उन्होंने बताया कि समृद्धि की पोटली धार्मिक मान्यताओं और श्रद्धा से जुड़ी पारंपरिक विधि है। वास्तविक समृद्धि के लिए माता लक्ष्मी की कृपा के साथ मेहनत, ईमानदारी, बचत और सद्कर्म भी आवश्यक हैं। बाबूलाल शास्त्री ने सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कामना की कि माता महालक्ष्मी सभी के घरों में सुख-समृद्धि और मंगल बनाए रखें।

Madan Mohan Garg(Gangapur City)
नाम: मदन मोहन गर्ग
वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (दैनिक प्रातःकाल, गंगापुर सिटी)
कार्यक्षेत्र: गंगापुर सिटी विधानसभा क्षेत्र सहित सवाई माधोपुर और करौली जिला
बीट: प्रशासनिक समाचार, सामाजिक कार्यक्रम, जनसमस्याएं एवं सभी क्षेत्र
परिचय
मदन मोहन गर्ग राजस्थान के गंगापुर सिटी क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'दैनिक प्रातःकाल' में गंगापुर सिटी के ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत हैं। उनका मुख्य कार्यक्षेत्र गंगापुर सिटी विधानसभा सहित सवाई माधोपुर और करौली जिला है। वह स्थानीय जनसमस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों, सरकारी योजनाओं और सामाजिक कार्यक्रमों सहित सभी क्षेत्रों की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव
मदन मोहन गर्ग को क्षेत्रीय पत्रकारिता का लंबा अनुभव है। वह साल 2015 से लगातार 'दैनिक प्रातःकाल' समाचार पत्र से जुड़े हुए हैं और क्षेत्र में समाचार संकलन व ब्यूरो संचालन का कार्य संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
वह उच्च शिक्षित हैं और उनकी शैक्षणिक योग्यता इस प्रकार है:
- बी.ए. (B.A.) और बी.एड. (B.Ed.)
- एम.ए. (M.A.) और एम.एड. (M.Ed. - मास्टर ऑफ एजुकेशन)
