मार्गशीर्ष में भगवान कृष्ण की शंख और तुलसी से पूजा का विशेष महत्व
मार्गशीर्ष मास में भगवान कृष्ण और विष्णु की तुलसी और शंख से पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस महीने में भगवान की आराधना से मोक्ष और मनोकामनाओं की सिद्धि होती है। जानिए मार्गशीर्ष मास की धार्मिक परंपराएं, पूजा विधि और इसका आध्यात्मिक महत्व।

कार्तिक मास के समाप्त होते ही जब मार्गशीर्ष का महीना आरंभ होता है, तो मानो पूरे वातावरण में भक्ति और पवित्रता की नई लहर दौड़ जाती है। धर्मग्रंथों में वर्णित है कि सतयुग में देवताओं ने मार्गशीर्ष मास से ही नववर्ष का प्रारंभ किया था। इसीलिए यह महीना न केवल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना गया है, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण और विष्णु की आराधना के लिए भी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
इस महीने में तुलसी और शंख से भगवान कृष्ण की पूजा का विधान है। प्रातः और सायंकाल गायत्री मंत्र का जप करने से मन और आत्मा की शुद्धि होती है। शास्त्रों में उल्लेख है कि अगहन मास (मार्गशीर्ष) में भगवान विष्णु की गरुड़ पर लक्ष्मीजी के साथ विराजमान स्वरूप की आराधना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दौरान पूजा के समय धूप, आरती और स्नान के उपरांत भगवान विष्णु के समक्ष घंटा बजाना शुभ फलदायी माना गया है।
भक्तजन इस महीने में एक शंख में चंदन रखकर प्रतिदिन भगवान विष्णु को अर्पित करते हैं। साथ ही तुलसीदल और आंवला अर्पित करने का भी विशेष महत्व बताया गया है। ऐसी पूजा करने वाले भक्त को समस्त दुखों से मुक्ति और मनोकामनाओं की सिद्धि प्राप्त होती है।
स्कंदपुराण में कहा गया है कि भगवान विष्णु को तुलसी सबसे अधिक प्रिय हैं। जिस तुलसी के पत्ते कटे न हों और जो मंजरी सहित हों, वे तुलसी भगवान विष्णु के लिए उतनी ही प्रिय हैं जितनी लक्ष्मीजी स्वयं। इसके अतिरिक्त बेला, चमेली, जही, अतिमुक्ता (माधवी लता), कनेर, वैजयन्ती, विजया और चमेली के गुच्छों से पूजा करने का विशेष फल मिलता है।
धार्मिक मान्यता है कि मार्गशीर्ष महीने में भगवान विष्णु की आरती कपूर के दीपक से करनी चाहिए। इस मास में तीर्थ स्नान को भी अनिवार्य माना गया है, जिससे व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। यह भी कहा गया है कि जो भक्त पूरे श्रद्धाभाव से इस महीने में भगवान श्रीकृष्ण और विष्णु की उपासना करता है, उसे न केवल भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है, बल्कि जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति भी मिलती है।
इस प्रकार मार्गशीर्ष का महीना भक्ति, श्रद्धा और शुद्धता का प्रतीक है — एक ऐसा समय जब तुलसी की सुगंध और शंख की ध्वनि के साथ हर घर में आस्था का दीप प्रज्वलित होता है।
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