दिवाली के आगमन का संकेत वसुबारस के दिन से मिलता है, जो आश्विन माह की वद्य द्वादशी को मनाया जाता है। इसे गोवत्स द्वादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन घरों में गोधन, विशेषकर बछडे़ और गाय, की विधिवत पूजा की जाती है और उनके प्रति आभार व्यक्त किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्रमंथन के समय पांच कामधेनू उत्पन्न हुई थीं, जिनमें से नंदा नामक गाय के सम्मान में यह व्रत संपन्न किया जाता है।

वसुबारस के दिन घरों में विशेष रीति-रिवाज निभाए जाते हैं। इस अवसर पर गाय और बछडे़ को स्नान कराया जाता है, उनके शरीर पर हल्दी लगाई जाती है और उन्हें नई वस्त्रों से सुसज्जित किया जाता है। इस दिन गोधन को अंकुरित मूंग और चने का भोग चढ़ाया जाता है। महिलाएं उपवास रखती हैं, जिसमें वे गहू और मूंग का सेवन नहीं करती और केवल बाजरी की भाकरी तथा गवारी के शेंग की भाजी लेकर व्रत पूर्ण करती हैं।

वसुबारस केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कृषि और परिवार की भलाई के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन की पूजा से घर में समृद्धि, बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। घरों में रांगोली बनाना और तुळशी के सामने तथा घर के दरवाजों पर दीपक जलाना इस दिन की विशेष परंपरा है, जो दिवाली के पर्व की शुरुआत का प्रतीक है।

शाम के समय विशेष आरती की जाती है और गोधन की पूजा-पाठ का समापन होता है। इस अवसर पर उन्हें फूलों की माला, पीले वस्त्र और सिंदूर का टीका अर्पित किया जाता है। पारंपरिक भोग के रूप में अंकुरित मूंग और चने का वितरण किया जाता है, जिससे धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व का संदेश घर-परिवार तक पहुँचता है।


वसुबारस केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह पारिवारिक, सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से भी लोगों को एकजुट करने वाला पर्व है। इसके माध्यम से न केवल धार्मिक आस्था प्रकट होती है, बल्कि कृषि और घरेलू समृद्धि की कामना के साथ आने वाली दिवाली की खुशियों की शुरुआत होती है।

इस वर्ष वसुबारस शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2025 को पड़ रहा है। इस पावन दिन पर श्रद्धालु विधिपूर्वक पूजा-अर्चना कर गायों की सेवा करते हुए अपने घरों में दिवाली का शुभारंभ करेंगे। आप सभी को भी दिवाली की ढेर सारी शुभकामनाए।।।

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Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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