भारत सहित विश्वभर में जैन समुदाय के लिए अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व रखने वाला पर्व महावीर जयंती वर्ष 2026 में 31 मार्च, मंगलवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह दिन जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर, भगवान महावीर के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिनका जीवन और उपदेश आज भी मानवता के लिए मार्गदर्शक बने हुए हैं।

भगवान महावीर, जिन्हें उनके जन्म नाम वर्धमान के रूप में भी जाना जाता है, का जन्म चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हुआ था। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, उनका जन्म 599 ईसा पूर्व में बिहार के वैशाली जिले के अंतर्गत स्थित कुंडलाग्राम में एक क्षत्रिय राजवंशीय परिवार में हुआ। उनके पिता सिद्धार्थ और माता त्रिशला थे, और वे नाय (ज्ञातृक) कुल से संबंधित थे।

इतिहासकारों के अनुसार, भगवान महावीर का जीवन 6वीं या 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व के बीच का माना जाता है। हालांकि उनके जीवन की तिथियों को लेकर विभिन्न जैन परंपराओं दिगंबर और श्वेतांबर में मतभेद देखने को मिलते हैं।

  • श्वेतांबर परंपरा के अनुसार, उनका निर्वाण 527 ईसा पूर्व में हुआ।
  • दिगंबर परंपरा के अनुसार, यह घटना 510 ईसा पूर्व में मानी जाती है।

फिर भी, विद्वानों के बीच भगवान महावीर के ऐतिहासिक अस्तित्व को लेकर कोई विवाद नहीं है।


भगवान महावीर ने लगभग 30 वर्ष की आयु में सांसारिक जीवन का त्याग कर दिया और कठोर तपस्या एवं ध्यान में लीन हो गए। लगभग 12 वर्ष 6 महीने की कठिन साधना के बाद उन्होंने केवल ज्ञान (सर्वज्ञता) प्राप्त किया। इसके पश्चात उन्होंने लगभग 30 वर्षों तक धर्म का प्रचार-प्रसार किया और अंततः 72 वर्ष की आयु में मोक्ष (निर्वाण) प्राप्त किया।

जैन धर्म में भगवान महावीर का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्हें तीर्थंकरों की परंपरा का अंतिम प्रवर्तक माना जाता है, जिन्होंने अपने पूर्ववर्ती तीर्थंकर पार्श्वनाथ की शिक्षाओं को पुनर्जीवित और व्यवस्थित किया। जैन परंपरा के अनुसार, उन्होंने अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह जैसे सिद्धांतों को मानव जीवन का आधार बताया।

भगवान महावीर की प्रतिमाएं प्रायः ध्यानमग्न मुद्रा में दिखाई देती हैं, जिनके नीचे सिंह का चिह्न अंकित होता है। उनकी प्रारंभिक मूर्तिकला के प्रमाण उत्तर भारत के मथुरा क्षेत्र से प्राप्त हुए हैं, जो पहली शताब्दी ईसा पूर्व से दूसरी शताब्दी ईस्वी के बीच के माने जाते हैं। महावीर जयंती के अवसर पर देशभर में भव्य शोभायात्राएं, धार्मिक प्रवचन, पूजा-अर्चना और दान-पुण्य के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह दिन केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि अहिंसा, करुणा और आत्मसंयम के मूल्यों को आत्मसात करने का संदेश भी देता है।


महावीर जयंती केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व का स्मरण नहीं, बल्कि उन सिद्धांतों की पुनर्पुष्टि है जो आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। जब दुनिया हिंसा, असहिष्णुता और भौतिकवाद की चुनौतियों से जूझ रही है, तब भगवान महावीर के उपदेश मानवता को एक शांतिपूर्ण और संतुलित जीवन की दिशा दिखाते हैं।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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