संकष्टी चतुर्थी पर चंद्र दर्शन क्यों जरूरी? जानिए कितने बजे होगा चंद्रोदय...
आज देशभर में श्रद्धा के साथ संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जा रहा है। भक्त दिनभर उपवास रखकर भगवान गणेश की पूजा करते हैं और रात में चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करते हैं। भारत में आज चंद्रोदय लगभग रात 9:21 बजे होगा। जानिए इस व्रत का धार्मिक महत्व, पूजा विधि और इससे जुड़ी मान्यताएं।

संकष्टी चतुर्थी का पावन व्रत आज देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। भगवान गणेश को समर्पित इस विशेष दिन पर भक्त दिनभर उपवास रखकर विघ्नहर्ता की पूजा-अर्चना करते हैं और रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत का पारण करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत के पालन से जीवन के संकट, बाधाएं और कष्ट दूर होते हैं तथा परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार आज भारत में चंद्रोदय का समय लगभग रात 9 बजकर 21 मिनट के आसपास रहेगा, हालांकि अलग-अलग शहरों के अनुसार इसमें कुछ मिनटों का अंतर संभव है। सूर्यास्त लगभग शाम 6 बजकर 45 मिनट के आसपास होगा, जबकि चंद्रास्त अगले दिन सुबह करीब 8 बजकर 26 मिनट पर माना जा रहा है। संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्र दर्शन का विशेष महत्व होता है, इसलिए भक्त चंद्रोदय के समय का इंतजार करते हैं और उसके बाद विधिपूर्वक भगवान गणेश की पूजा कर व्रत पूर्ण करते हैं।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस दिन प्रातःकाल स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। दिनभर उपवास रखते हुए शाम के समय भगवान गणेश की विधिवत पूजा की जाती है। पूजा में दूर्वा, लड्डू और विशेष रूप से मोदक का भोग लगाया जाता है, जिन्हें गणेशजी का प्रिय प्रसाद माना जाता है। इसके बाद चंद्रमा के दर्शन कर गणेश भगवान की आरती की जाती है और तब व्रत का पारण किया जाता है।
मान्यता यह भी है कि संकष्टी चतुर्थी का व्रत संतान की उन्नति, परिवार की सुख-शांति और आर्थिक समृद्धि के लिए विशेष फलदायी होता है। श्रद्धालु इस दिन गणेश मंत्रों का जाप, गणेश चालीसा का पाठ और भगवान गणेश की आराधना कर विशेष पुण्य प्राप्त करने की कामना करते हैं।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यदि संकष्टी चतुर्थी मंगलवार के दिन पड़ती है, तो उसे अंगारकी संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जिसका महत्व सामान्य संकष्टी से भी अधिक माना जाता है। ऐसे अवसर पर गणेश भक्तों की आस्था और श्रद्धा अपने चरम पर दिखाई देती है।
आस्था और परंपरा से जुड़ा यह पर्व न केवल धार्मिक मान्यताओं का प्रतीक है, बल्कि यह भक्तों के लिए भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने और जीवन के संकटों से मुक्ति की कामना का भी एक महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
