कार्तिगई दीपम, हिन्दू धर्म का एक प्रमुख पर्व, हर वर्ष कार्तिक मास की पूर्णिमा या उसके निकटतम शनिवार को मनाया जाता है। इस वर्ष 2025 में यह पर्व विशेष रूप से 3 दिसंबर को मनाया जा रहा है। यह त्यौहार प्रकाश और आस्था का प्रतीक माना जाता है, जो अंधकार और अज्ञानता पर ज्ञान और दिव्यता की विजय का संदेश देता है। दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु और केरल में इसे बड़े उत्साह और भव्य रीति-रिवाज के साथ मनाया जाता है।

कार्तिगई दीपम का इतिहास धार्मिक ग्रंथों और पौराणिक कथाओं में मिलता है। कहा जाता है कि भगवान शिव के प्रकाश रूप का प्रदर्शन करने के लिए आकाश में कार्तिकेय नक्षत्र समूह को विशेष मान्यता दी गई थी। इसी परंपरा के अनुसार घरों और मंदिरों में तेल के दीपक जलाकर पूजा की जाती है। लोग अपने घरों में, खासकर छतों और आंगनों में दीपक लगाकर सुख, समृद्धि और परिवार की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करते हैं।

तमिलनाडु के प्रसिद्ध तिरुवन्नामलाई मंदिर में इस पर्व का महत्व और भी बढ़ जाता है। यहाँ आकाश में विशाल दीप जलाए जाते हैं, जिन्हें देखने के लिए हजारों श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं। दीपम जलाने की परंपरा का धार्मिक महत्व यह है कि यह आत्मा के भीतर बुराई और अज्ञान के अंधकार को दूर कर, मन को शांति और ज्ञान की ओर प्रेरित करता है।

कार्तिगई दीपम का आयोजन केवल धार्मिक उत्सव तक सीमित नहीं है। यह सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि परिवार और समुदाय के लोग एकत्रित होकर सामूहिक पूजा और दीप प्रज्ज्वलन करते हैं। विशेष रूप से तिरुवन्नामलाई, मदुरै, चेन्नई और केरल के प्रमुख मंदिरों में इस दिन विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। सरकारी और स्थानीय प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा और आयोजन की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है, ताकि पर्व शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से मनाया जा सके।

इस पर्व के दौरान दीप जलाने के साथ-साथ विशेष भजन, कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। लोग पुराने परंपरागत व्यंजन बनाकर अपने परिवार के साथ साझा करते हैं। वहीं, बच्चों और युवाओं को भी इस दिन धार्मिक शिक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों की समझ दी जाती है।

कार्तिगई दीपम केवल प्रकाश का पर्व नहीं, बल्कि आस्था, ज्ञान और समाज में एकता का प्रतीक भी है। यह त्यौहार यह संदेश देता है कि जीवन में अंधकार चाहे जितना भी गहरा हो, साधना और श्रद्धा के माध्यम से उसे हराया जा सकता है। दक्षिण भारत में इसका महत्व इतना अधिक है कि स्थानीय प्रशासन और समाज मिलकर इसे भव्य रूप से मनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते।

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Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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