दक्षिण भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में गहराई से रचा-बसा पंगुनि उठिरम वर्ष 2026 में 1 अप्रैल, बुधवार को पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। यह पर्व तमिल महीने ‘पंगुनी’ (मार्च–अप्रैल) की पूर्णिमा और उत्तिरम नक्षत्र के दुर्लभ संयोग पर आधारित है, जिसे अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष विशेष रूप से पौर्णमी गिरिवलम भी इसी दिन पड़ रहा है, जिससे इस पर्व का महत्व और अधिक बढ़ गया है।

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, उत्तिरम नक्षत्र 31 मार्च 2026 को दोपहर 3:58 बजे प्रारंभ होगा और 1 अप्रैल 2026 को शाम 4:37 बजे समाप्त होगा। इसी दौरान पूर्णिमा का प्रभाव भी रहेगा, जो धार्मिक अनुष्ठानों और पूजन के लिए अत्यंत अनुकूल समय माना जाता है।


दिव्य विवाहों की स्मृति में मनाया जाने वाला पर्व:

पंगुनी उथिरम केवल एक धार्मिक तिथि नहीं, बल्कि हिंदू धर्म में वर्णित कई दिव्य विवाहों का स्मरण दिवस भी है। इस दिन भगवान

  • भगवान शिव और पार्वती
  • भगवान रमा और सीता
  • भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) और देवसेना
  • भगवान विष्णु (रंगनाथ) और आंडाल

के पवित्र विवाहों का स्मरण किया जाता है। इसके अतिरिक्त, इस दिन भगवान अयप्पा के प्रकट होने का भी उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान देवी लक्ष्मी का प्रकट होना भी इसी दिन से जोड़ा जाता है, जिसे महालक्ष्मी जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। यह पर्व ‘गृहस्थ धर्म’ यानी विवाहित जीवन के आदर्शों और महत्व को रेखांकित करता है। दांपत्य जीवन में प्रेम, समर्पण और संतुलन की भावना को सुदृढ़ करने के लिए श्रद्धालु विशेष प्रार्थनाएं करते हैं। कई स्थानों पर इस दिन विवाह और सगाई जैसे शुभ कार्य भी संपन्न किए जाते हैं।



पंगुनी उथिरम के अवसर पर श्रद्धालु विशेष पूजा-पाठ और व्रत रखते हैं। खासकर भगवान मुरुगन के भक्त ‘कावड़ी’ उठाकर अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। यह कावड़ी एक सजावटी ढांचा होता है, जिसमें दूध या फूल अर्पित किए जाते हैं और इसे मंदिरों तक ले जाकर अर्पित किया जाता है।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर के ‘तुम्बुरु तीर्थ’ में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। वहीं एकाम्बरेश्वर मंदिर में यह पर्व 13 दिनों तक चलने वाले उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जहां पृथ्वी तत्व के लिंगम की विशेष पूजा की जाती है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार, कांचीपुरम में माता पार्वती ने गौरी रूप में भगवान शिव से विवाह किया था, जिसके कारण इस दिन को ‘गौरी कल्याणम’ के रूप में भी मनाया जाता है।

स्थानीय परंपराओं के अनुसार, कांचीपुरम में देवी पार्वती ने ‘गौरी’ रूप में भगवान शिव से विवाह किया था, जिसके कारण इस दिन को ‘गौरी कल्याणम’ के रूप में भी मनाया जाता है। पंगुनी उथिरम न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति में निहित पारिवारिक मूल्यों, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का भी प्रतीक है। हर वर्ष यह दिन भक्तों को दांपत्य जीवन की गरिमा, भक्ति की शक्ति और परंपराओं की गहराई का अनुभव कराता है। 2026 में यह पर्व एक बार फिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था और विश्वास का केंद्र बनेगा।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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