कितने बजे निकलेगा चांद? बिना चांद को अर्घ्य दिए अधूरा है व्रत, जानें अपने शहर में मूनराइज टाइमिंग।
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देश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में चंद्रोदय के समय में भिन्नता होने के कारण श्रद्धालुओं को विशेष सावधानी बरतनी होगी। खगोलीय गणनाओं के अनुसार, आज रात राजधानी दिल्ली और एनसीआर के क्षेत्रों में चंद्रमा के दर्शन रात्रि 09:35 बजे होने की संभावना है, जबकि आर्थिक राजधानी मुंबई में यह समय 09:48 बजे रहेगा। दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों जैसे बेंगलुरु और चेन्नई में क्रमशः रात्रि 09:34 और 09:23 बजे चंद्रोदय होगा। वहीं, सांस्कृतिक नगरी कोलकाता में सबसे पहले रात्रि 08:51 बजे ही चंद्रमा अपनी आभा बिखेरेंगे। जयपुर, अहमदाबाद, पुणे और लखनऊ जैसे शहरों में भी रात्रि 09:22 से 09:51 बजे के बीच चंद्र देव के दर्शन होंगे, जिसके पश्चात ही भक्त अपने व्रत का पारण कर सकेंगे।
अध्यात्म और श्रद्धा के संगम का प्रतीक 'द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी' आज, 5 फरवरी 2026, गुरुवार को पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही है। भगवान गणेश को समर्पित यह पावन तिथि भक्तों के लिए दुखों के निवारण और सुख-समृद्धि के द्वार खोलने वाली मानी जाती है। शास्त्रों में वर्णित मान्यताओं के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का यह विशेष उपवास तब तक पूर्णता को प्राप्त नहीं होता, जब तक कि साधक रात्रि के समय चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित न कर दे। आज सुबह से ही शिवालयों और गणेश मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है, जहां भक्त अपने आराध्य 'विघ्नहर्ता' की आराधना में लीन हैं और रात्रि के उस क्षण की प्रतीक्षा कर रहे हैं जब चंद्रदेव के दर्शन के साथ उनके संकल्प की सिद्धि होगी।
धार्मिक मर्यादाओं के अनुसार, इस व्रत के पारण की विधि अत्यंत विशिष्ट और फलदायी मानी गई है। रात्रि में चंद्र दर्शन के उपरांत एक तांबे के पात्र में जल, कच्चा दूध, अक्षत और श्वेत पुष्पों का मिश्रण तैयार कर चंद्रमा को अर्घ्य देना अनिवार्य है। इसके पश्चात भगवान गणेश की अंतिम आरती कर उनसे जीवन के समस्त संकटों को हरने की प्रार्थना की जाती है। व्रत खोलने की प्रक्रिया में सात्विकता का विशेष महत्व है; भक्त सर्वप्रथम भगवान को अर्पित किए गए मोदक या लड्डू को प्रसाद स्वरूप ग्रहण कर अपना उपवास समाप्त करते हैं। शास्त्रों का निर्देश है कि व्रत के उपरांत भोजन पूर्णतः सात्विक होना चाहिए और अगले दिन दान-पुण्य की परंपरा का निर्वहन करने से ही इस कठिन तपस्या का संपूर्ण आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। यह पर्व न केवल व्यक्तिगत आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय संस्कृति की उस गहरी जड़ को भी दर्शाता है जहाँ संयम और दान को जीवन का आधार माना गया है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
