भारत की धार्मिक परंपराओं में ऐसे पर्व कम हैं, जिनका उत्साह, आस्था और अनुशासन हर वर्ग को समान रूप से जोड़ता है। विनायक चतुर्थी भी उन्हीं विशेष पर्वों में से एक है, और विनायक चतुर्थी इस वर्ष श्रद्धालुओं के लिए विशेष मान्यता लेकर आ रही है। मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली यह चतुर्थी न केवल गणेश उपासना का पवित्र अवसर है, बल्कि पंचांग के अनुसार अनेक शुभ योगों का संगम भी मानी जा रही है। गणपति भक्त इस दिन दुख-निवारण, ज्ञान-वृद्धि और विघ्नहर्ता के आशीर्वाद की विशेष कामना करते हैं।

पंचांग विश्लेषण के अनुसार, 24 नवंबर 2025 को यह पावन तिथि मनाई जाएगी। ज्योतिषीय दस्तावेजों में दर्ज है कि चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 24 नवंबर की दोपहर से माना गया, जिसके दौरान शुभ मुहूर्त दोपहर 11:04 बजे से 01:11 बजे तक सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। आस्था रखने वालों के लिए यह समय “संकट निवारण चतुर्थी” के प्रभाव के रूप में भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि मार्गशीर्ष मास में पड़ने वाली चतुर्थी को विशेष रूप से दैवीय ऊर्जा से युक्त माना जाता है। गणेश पूजा के लिए किए गए संकल्प इसी अवधि में सर्वाधिक फलदायी माने जाते हैं।

पर्व की धार्मिक और सामाजिक मान्यता का दायरा वर्षों से विस्तृत होता गया है। विनायक चतुर्थी की पूजा विधि में गणपति स्थापना, दूर्वा अर्पण, मोदक भोग, गणेश स्तोत्र पाठ और रात्रि व्रत का पालन प्रमुख है। स्थानीय प्रशासन ने भी त्योहार के आयोजन को सुचारू रखने हेतु तैयारियाँ शुरू कर दी हैं, जिनमें मंदिरों में भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन की आधिकारिक रूपरेखा शामिल है। पंडालों में पूजा के लिए विशेष मंडप तैयार किए जा रहे हैं, जबकि विभिन्न धार्मिक संस्थान इस अवसर पर सामाजिक सेवा कार्यक्रमों की योजना बना रहे हैं।

चतुर्थी तिथियों का महत्व भारतीय पंचांग परंपरा में अत्यंत गहरा रहा है। देवताओं में प्रथम पूज्य माने जाने वाले श्री गणेश की अराधना हर चतुर्थी को की जाती है, लेकिन विनायक चतुर्थी को मार्गशीर्ष मास का अतिरिक्त पावन स्पर्श प्राप्त है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए व्रत और पूजन से विघ्नों का निवारण होता है तथा परिवार में समृद्धि और सौभाग्य का संचार होता है। ज्योतिष विद्वानों का यह भी मानना है कि यह समय मानसिक शांति, निर्णय क्षमता और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने का श्रेष्ठ अवसर है।

आस्था से भरा यह पर्व अनुयायियों के लिए केवल धार्मिक अनुष्ठान का दिन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और पारिवारिक एकता का प्रतीक भी है। दिनभर मंदिरों में घंटियों की ध्वनि, मंत्रोच्चार और भक्तिमय वातावरण का दृश्य भारत की आध्यात्मिक विरासत का जीवंत प्रमाण बन जाता है। जैसे-जैसे विनायक चतुर्थी नजदीक आ रही है, श्रद्धालुओं में उत्साह बढ़ रहा है, और समाज एक बार फिर इस पवित्र तिथि पर विघ्नहर्ता के आशीर्वाद के स्वागत को तैयार है। यह दिवस स्मरण कराता है कि धार्मिक आस्था केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि सद्भाव, एकता और परंपरा की निरंतरता का माध्यम भी है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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