:नवंबर का महीना इस वर्ष भक्तों के लिए विशेष महत्व लेकर आया है, जब पवित्र विनायक चतुर्थी पूरे देश में श्रद्धा और पारंपरिक आस्था के साथ मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, यह चतुर्थी शुक्ल पक्ष में पड़ती है और भगवान गणेश की आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। वर्ष 2025 में यह पर्व उस समय मनाया जाएगा, जब देश के कई हिस्सों में धार्मिक आयोजन और समुदायिक उत्सवों के बीच गणेश भक्ति की धारा प्रवाहित होगी।

नवंबर 2025 की विनायक चतुर्थी की तिथि पंचांग में विशेष रूप से उल्लेखित है, जहाँ चतुर्थी तिथि के आरंभ और समाप्ति समय को धार्मिक गणनाओं के अनुसार महत्वपूर्ण माना गया है। इस तिथि पर भगवान गणेश की उपासना को विघ्नों के नाश, कार्यों की सफलता और मनोबल में वृद्धि का प्रतीक बताया गया है। गणेश को प्रथम पूज्य देव माना जाता है, और विनायक चतुर्थी का पर्व उनके इसी स्थान को पुनर्स्थापित करता है।


पर्व से जुड़ी पौराणिक कथाएँ बताती हैं कि गणेश को माता पार्वती और भगवान शिव का वरदान प्राप्त हुआ कि वे हर शुभ कार्य में सर्वप्रथम पूजित होंगे। इसी श्रद्धा के साथ भक्त इस चतुर्थी पर विशेष अनुष्ठान करते हैं और अपने परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं।

क्यों मनाई जाती है विनायक चतुर्थी:

यह चतुर्थी भगवान गणेश की जन्म-तिथि का स्मरण कराती है और उन्हें विघ्नहर्ता व बुद्धि-प्रदाता के रूप में पूजने का अवसर देती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन गणेश की उपासना मन को शांति, जीवन में सौभाग्य और कार्यों में सिद्धि प्रदान करती है। यह पर्व भक्तों को नई शुरुआत करने और बाधाओं को दूर करने का आध्यात्मिक संदेश देता है।

पूजा कैसे करें:

  • प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ आसन पर गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है।
  • षोडशोपचार या सरल पंचोपचार विधि से पूजा की जाती है।
  • धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प, दूर्वा और जल अर्पित कर मंत्रों का जाप किया जाता है।
  • अंत में आरती और नैवेद्य चढ़ाया जाता है।


पूजन सामग्री:

  • दूर्वा घास, मोदक,
  • रोली, चावल, पुष्प,
  • धूपबत्ती, दीपक, पंचामृत,
  • लाल वस्त्र, तुलसी जल, केले के पत्ते, नैवेद्य
  • ताम्र-पात्र में रखा स्वच्छ जल


प्रसाद में क्या चढ़ाएँ:
  • मोदक, लड्डू, गुड़, नारियल, तिल से बने मिठाई, फल और पंचामृत
  • पारंपरिक रूप से घर में बने चावल के मोदक गणेश जी का प्रिय प्रसाद माना गया है।


प्रमुख मंत्र:
  • “ॐ गं गणपतये नमः”,
  • “वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ”,
  • “गणपति बप्पा मोरया”


नवंबर 2025 की यह विनायक चतुर्थी केवल एक धार्मिक तिथि भर नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की निरंतरता है। यह पर्व आस्था, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का संगम बनकर हर घर में भक्तिपूर्ण वातावरण का सृजन करता है। पूरे देश में भक्त इस दिन गणेश के आशीर्वाद की कामना करते हुए पूजा-अनुष्ठान संपन्न करेंगे और परिवार की समृद्धि के लिए प्रार्थनाएँ करेंगे।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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