स्कंद पुराण में वर्णित वट सावित्री व्रत कथा सावित्री और सत्यवान की दिव्य कहानी है, जिसमें सावित्री ने अपनी अटूट श्रद्धा, पतिव्रता धर्म और बुद्धिमत्ता से यमराज को भी सत्यवान के प्राण लौटाने पर विवश कर दिया। यह कथा भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति और अखंड सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती है।

सनातन धर्म के स्कंद पुराण में वर्णित वट सावित्री व्रत कथा श्रद्धा, त्याग, पतिव्रता धर्म और अटूट संकल्प की वह दिव्य कथा है, जिसमें एक साधारण स्त्री की भक्ति ने स्वयं मृत्यु के देवता यमराज को भी झुका दिया। यह कथा सनतकुमार के प्रश्न से प्रारंभ होती है, जब वे भगवान शिव से पूछते हैं कि ऐसा कौन-सा व्रत है जो स्त्रियों को अखंड सौभाग्य, पुत्र-पौत्र सुख और समृद्धि प्रदान करता है।

भगवान शिव ने उत्तर में राजा अश्वपति की कथा सुनाई, जो मद्र देश के एक अत्यंत धर्मनिष्ठ, वेदज्ञानी और पराक्रमी सम्राट थे। समस्त ऐश्वर्य और वैभव होने के बावजूद वे संतानहीनता के कारण दुखी रहते थे। संतान प्राप्ति की कामना से उन्होंने कठोर तप किया और देवी सावित्री की आराधना की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर देवी सावित्री प्रकट हुईं और वरदान दिया कि उनके घर एक दिव्य कन्या का जन्म होगा, जो अपने पति और उसके कुल का उद्धार करेगी तथा उसका नाम भी सावित्री ही होगा।

समय आने पर राजा अश्वपति के घर अत्यंत तेजस्वी कन्या का जन्म हुआ, जिसका नाम सावित्री रखा गया। उसकी सुंदरता, तेज और दिव्यता अद्वितीय थी, जिसे देखकर समस्त राजागण भी स्तब्ध रह जाते थे। विवाह योग्य होने पर राजा ने पुत्री को स्वयं योग्य वर चुनने की अनुमति दी। सावित्री ने द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान को अपने पति के रूप में चुना, जो वन में अपने नेत्रहीन एवं राज्यविहीन पिता के साथ रहते थे।

देवर्षि नारद ने राजा को चेतावनी दी कि सत्यवान अत्यंत गुणवान, सत्यनिष्ठ और सद्गुणी हैं, किंतु उनका जीवन केवल एक वर्ष का शेष है। यह सुनकर राजा अश्वपति चिंतित हुए और विवाह से रोकने का प्रयास किया, लेकिन सावित्री ने दृढ़ता से कहा कि एक बार निर्णय लेने के बाद उससे पीछे हटना उचित नहीं है। उसने संस्कृत श्लोक के माध्यम से भी अपने संकल्प को व्यक्त किया कि राजाज्ञा, पंडितों का वचन और कन्यादान एक बार ही होते हैं, इसलिए वह अपना निर्णय नहीं बदलेगी।

अंततः सावित्री का विवाह सत्यवान से हो गया और वह अपने पति के साथ वन में रहने लगी। नारद के कथन के अनुसार, वह दिन धीरे-धीरे निकट आने लगा जब सत्यवान की मृत्यु निश्चित थी। सावित्री ने उस दिन का कठोर व्रत आरंभ कर दिया और लगातार उपवास एवं ध्यान में लीन रहने लगी।

निर्धारित दिन पर सत्यवान लकड़ी काटने वन गए, और सावित्री भी उनके साथ चली गई। वन में कार्य करते समय सत्यवान के सिर में तीव्र पीड़ा होने लगी और वे वट वृक्ष के नीचे गिर पड़े। उसी क्षण सावित्री ने अनुभव किया कि मृत्यु का समय आ गया है। तभी यमराज काले-भूरे वर्ण के दिव्य स्वरूप में वहाँ प्रकट हुए और सत्यवान के प्राणों को पाश में बाँधकर दक्षिण दिशा की ओर ले जाने लगे।

सावित्री ने यमराज का पीछा किया। यमराज ने उसे समझाया कि वह लौट जाए, लेकिन सावित्री ने धर्म, पतिव्रता कर्तव्य और आत्मबल के आधार पर उनके साथ चलना जारी रखा। यमराज उसके धर्मनिष्ठ संवाद से प्रसन्न हुए और उसे तीन वरदान देने का प्रस्ताव दिया। पहले वरदान में सावित्री ने अपने नेत्रहीन ससुर राजा द्युमत्सेन की दृष्टि और उनका खोया हुआ राज्य पुनः प्राप्त करने की प्रार्थना की, जिसे यमराज ने स्वीकार किया। दूसरे वरदान में उसने अपने पिता राजा अश्वपति के लिए सौ पुत्रों का वरदान मांगा, जिसे भी यमराज ने प्रदान किया।

तीसरे वरदान में सावित्री ने अत्यंत चतुराई से कहा कि उसे अपने पति सत्यवान से ही सौ पुत्रों की माता बनने का आशीर्वाद चाहिए। यह सुनकर यमराज प्रसन्न हुए, लेकिन जब उन्होंने कहा कि यह वरदान बिना सत्यवान के जीवन के संभव नहीं, तब सावित्री ने यमराज को धर्म और सत्य के मार्ग पर विचार करने के लिए विवश कर दिया। अंततः यमराज ने प्रसन्न होकर सत्यवान के प्राण मुक्त कर दिए और उन्हें दीर्घायु का आशीर्वाद दिया। सावित्री तुरंत सत्यवान के पास लौटी और उन्हें जीवित पाया। उसी समय द्युमत्सेन की दृष्टि लौट आई और राज्य भी वापस प्राप्त हुआ।

इसी बीच समाचार आया कि उनके राज्य का अन्यायपूर्ण अधिग्रहण करने वाले दुष्ट मंत्री का अंत हो गया है, और राजकुमारों को राज्य पुनः सौंप दिया गया है। सावित्री और सत्यवान के जीवन में पुनः सुख और समृद्धि लौट आई। अंत में भगवान शिव ने कहा कि इस व्रत के प्रभाव से स्त्रियों को अखंड सौभाग्य, परिवार की रक्षा और संतान सुख प्राप्त होता है, तथा यह व्रत मृत्यु पर भी धर्म की विजय का प्रतीक है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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