वाराणसी: बारिश के बीच चेतगंज में निकला नक्कटैया मेला, दिखीं भव्य झांकियां
अर्नब चक्रवात की बारिश के बावजूद चेतगंज में 140वां ऐतिहासिक नक्कटैया मेला पारंपरिक उल्लास, लाग-विमानों और सामाजिक संदेशों की झांकियों के साथ संपन्न हुआ।

वाराणसी के चेतगंज में आयोजित ऐतिहासिक नक्कटैया मेले में अर्नब चक्रवात की बारिश के बीच करतब दिखाते कलाकार।
अर्नब चक्रवात के कारण रातभर होती रही भारी बारिश भी वाराणसी के चेतगंज में आयोजित विश्वप्रसिद्ध नक्कटैया मेले में उमड़ी आस्था की भीड़ का उत्साह कम नहीं कर सकी। गुरुवार की रात छाता और रेनकोट लेकर हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बनने के लिए सड़कों पर पहुंच गए। रिमझिम फुहारों और सुहानी हवाओं के बीच काशी की पारंपरिक धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का भव्य दृश्य देखने को मिला।
अर्नब चक्रवात के प्रभाव से पूरी रात बारिश जारी रही, लेकिन कलाकारों का उत्साह और बनारसियों की प्राचीन परंपराओं को देखने की उत्सुकता बरकरार रही। बारिश से बचने के लिए लोग दुकानों के शेड, मकानों के बारजों और छज्जों के नीचे खड़े रहे, लेकिन मेले का नजारा देखने के लिए अपनी जगह से नहीं हटे।
रात में टोटो और पारंपरिक वाहनों से लीला के पात्र चेतगंज पहुंचे। भगवान श्रीराम के रथ के समीप रामायणकालीन प्रसंग के तहत शूर्पणखा की नासिका छेदन लीला का सजीव मंचन किया गया। इस दृश्य के दौरान पूरा इलाका 'जय श्रीराम' और 'हर हर महादेव' के जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद शूर्पणखा की भव्य झांकी मलदहिया पटेल चौराहा होते हुए चेतगंज थाने के समीप पहुंची, जहां पारंपरिक लाग-विमानों का औपचारिक शुभारंभ हुआ।
आधी रात को रंग-बिरंगी झालरों और रोशनी से सजी सड़कों पर रामधुन के बीच सौ से अधिक लाग-विमानों की शोभायात्रा निकली। मलदहिया से शुरू होकर लहुराबीर, चेतगंज और पानदरीबा तक करीब पांच किलोमीटर के क्षेत्र में मेले का उल्लास भोर तक बना रहा। रोशनी से जगमगाती काशी की सड़कों पर श्रद्धालुओं को इस आयोजन का भव्य स्वरूप देखने को मिला।
नक्कटैया मेले के 140वें ऐतिहासिक पड़ाव पर इस बार प्राचीन परंपराओं के साथ आधुनिकता, समकालीन गौरव और सामाजिक सरोकारों का संगम भी देखने को मिला। हाल ही में गंगा के ऊपर वायु वीरों के शौर्य प्रदर्शन की गूंज के बीच मेले में एयर शो विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। लाग-विमानों में भारत की आधुनिक रक्षा क्षमता के प्रतीक तेजस, सुखोई और राफेल लड़ाकू विमानों की भव्य एवं कलात्मक प्रतिकृतियां प्रदर्शित की गईं। इनके माध्यम से भारतीय वायुसेना के पराक्रम को दर्शाया गया।
मेले में आध्यात्मिक आस्था के केंद्र कैंची धाम के बाबा नीम करौली की अलौकिक झांकी भी आकर्षण का हिस्सा रही। इसके साथ ही बच्चों और युवाओं पर मोबाइल फोन के बढ़ते दुष्प्रभावों को गंभीरता से दर्शाने वाली लाग के माध्यम से सामाजिक संदेश दिया गया। काशी के अलावा प्रयागराज, मिर्जापुर, जौनपुर, भदोही, आजमगढ़, चंदौली और सोनभद्र से पहुंचे कलाकारों ने अपने हैरतअंगेज करतबों और जीवंत प्रस्तुतियों से दर्शकों को भोर तक बांधे रखा।
चेतगंज नक्कटैया मेले की शुरुआत का इतिहास ब्रिटिश शासन के दौर से जुड़ा है। वर्ष 1888 में स्व. बाबा फतेह राम ने अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचारों और दमनकारी नीतियों के विरोध में इस परंपरा की नींव रखी थी। ब्रिटिश शासन की बंदिशों के बावजूद स्वांग, लाग-विमान और लोक प्रदर्शनों के जरिए आम लोगों में जनचेतना जगाने के उद्देश्य से यह आयोजन शुरू किया गया था। समय के साथ यह परंपरा अपनी भव्यता के साथ आज भी जारी है।
हालांकि, इस बार लगातार बारिश के कारण मेले की रौनक कुछ प्रभावित हुई। मेला परिसर में ठेला-पटरी लगाकर आजीविका चलाने वाले दुकानदार अपनी दुकानें नहीं सजा सके। चौबेपुर से मिट्टी के सुंदर खिलौने लेकर पहुंचे राजहंस ने बताया कि वह पिछले तीन महीने से मेले की तैयारी कर रहे थे और दुकान लगाने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन बारिश लगातार जारी रही। वहीं, चाट का ठेला लेकर पहुंचे रामचंद्र ने कहा कि लगातार बारिश के कारण मेले का बड़ा आनंद फीका पड़ गया।
बारिश के चलते दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले दर्शकों की संख्या भी इस बार न के बराबर रही। मेले में पहुंचे कुछ चुनिंदा दर्शक सड़क किनारे बने शेड के नीचे खड़े होकर लाग-विमानों का दर्शन करते रहे। भारी मानसूनी बारिश के कारण विभिन्न साज-सज्जा और सामान लेकर पहुंचे कलाकारों को भी अपनी प्रस्तुतियों की तैयारी में काफी परेशानी हुई।
बार-बार मेकअप धुलने से कलाकारों को प्रस्तुति से पहले काफी संघर्ष करना पड़ा। बारिश से बचने के लिए उन्हें रेनकोट, छाता और प्लास्टिक शीट का सहारा लेना पड़ा। इसके बावजूद अर्नब चक्रवात की बारिश, दुकानदारों की परेशानियों और कलाकारों की कठिनाइयों के बीच चेतगंज का ऐतिहासिक नक्कटैया मेला अपनी धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक संदेशों के साथ संपन्न हुआ।

Pratahkal Bureau
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