उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा: जब भगवान विष्णु की निद्रा से प्रकट हुईं देवी और मुर दैत्य का हुआ अंत
उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा भगवान विष्णु और मुर दैत्य के युद्ध की अद्भुत पौराणिक गाथा है। इस दिन भगवान की योगनिद्रा से प्रकट हुईं देवी ने असुर मुर का संहार किया और इसी दिन को “उत्पन्ना एकादशी” कहा गया। यह व्रत मोक्ष और पापों से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है।

धर्मग्रंथों में वर्णित उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा न केवल आस्था और भक्ति का प्रतीक है, बल्कि यह भगवान विष्णु की दिव्य शक्ति और उनकी लीलाओं का अद्भुत उदाहरण भी प्रस्तुत करती है। इस एकादशी का महत्व स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को सुनाया था, जिसमें उन्होंने एक अद्भुत कथा के माध्यम से इस व्रत की उत्पत्ति का रहस्य बताया।
प्राचीन काल में मुर नामक एक अत्यंत बलवान और अत्याचारी दैत्य हुआ करता था। उसकी इंद्रावती नाम की नगरी में वह अपनी शक्ति और आतंक से देवताओं तक को पराजित कर चुका था। भयभीत देवगणों ने पहले भगवान शिव से सहायता मांगी, जिन्होंने उन्हें विष्णु भगवान के शरण में जाने का परामर्श दिया। देवताओं ने विष्णु जी के समक्ष अपना दुख व्यक्त किया और इस असुर से रक्षा की प्रार्थना की।
भगवान विष्णु ने उनके निवेदन को स्वीकार कर मुर दैत्य का संहार करने का संकल्प लिया। एक भयंकर युद्ध छिड़ गया, जो दस हजार वर्षों तक चलता रहा। विष्णु भगवान के बाण उस दैत्य पर असर नहीं कर पा रहे थे, जिससे थककर भगवान बद्री आश्रम के हेमवती नामक गुफा में योगनिद्रा में चले गए।
मुर दैत्य उनका पीछा करता हुआ वहां पहुंचा और जब उसने सोए हुए भगवान पर प्रहार करने का प्रयास किया, तभी भगवान के शरीर से तेजस्विनी देवी प्रकट हुईं। उन्होंने रक्षक रूप धारण कर मुर को युद्ध के लिए ललकारा और तीव्र युद्ध में उस दैत्य का संहार कर दिया।
भगवान विष्णु जब योगनिद्रा से जागे और उन्होंने यह देखा, तो देवी की वीरता से अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा कि “तुम्हारा जन्म एकादशी के दिन हुआ है, इसलिए तुम्हारा नाम उत्पन्ना एकादशी होगा। तुम्हारी पूजा करने वाला भक्त मेरी भी पूजा का फल पाएगा।”
इस प्रकार उत्पन्ना एकादशी की स्थापना हुई, जो न केवल असत्य और अधर्म पर सत्य की विजय का प्रतीक है, बल्कि भक्ति, श्रद्धा और दिव्य ऊर्जा के जागरण का भी संदेश देती है। इस दिन व्रत और पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

Pratahkal Bureau
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