छठ पूजा की पौराणिक कथा ; जानिए कौन है छठी मैया और क्यों होती है इनकी पूजा ?
छठ पूजा की यह पौराणिक कथा आस्था और श्रद्धा से जुड़ी दिव्य गाथा है, जिसमें छठी मैया की उत्पत्ति, सूर्य देव से उनका संबंध और संतान सुख तथा समृद्धि का आशीर्वाद देने वाली उनकी कृपा का वर्णन मिलता है।

छठ पूजा
छठ महापर्व का समय आते ही पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। यह पर्व सूर्य देव की उपासना के साथ-साथ छठी मैया की पूजा के लिए जाना जाता है, जिन्हें माता षष्ठी भी कहा जाता है। कहा जाता है कि छठी मैया ऋषि कश्यप और माता अदिति की मानस पुत्री हैं, और सूर्य देव की बहन हैं। कुछ स्थानों पर उन्हें देवसेना नाम से भी पूजा जाता है।
छठी मैया बच्चों की रक्षा करती हैं और मातृत्व के सुख का आशीर्वाद देती हैं। जो माता-पिता संतान की कामना करते हैं, वे छठ का व्रत रखते हैं। यह व्रत बहुत कठिन जरूर है, लेकिन इसमें श्रद्धा और विश्वास की गहराई होती है।
एक कथा के अनुसार, जब ब्रह्मदेव ने इस सृष्टि का निर्माण किया, तब प्रकृति ने अपने आप को छह भागों में बांट लिया। उन छह स्वरूपों के छठे अंश से देवी षष्ठी का प्रकट होना हुआ। इसलिए उन्हें छठी मैया कहा गया। माना जाता है कि जो लोग सच्चे मन से उनकी पूजा करते हैं, मां उन्हें संतान सुख प्रदान करती हैं और बच्चों की रक्षा करती हैं।
लेकिन जब बच्चे का जन्म हुआ, वह मृत था। यह देखकर राजा और रानी गहरे दुख में डूब गए। राजा अपने पुत्र के शव को लेकर श्मशान पहुंचे और वहीं प्राण त्यागने का विचार करने लगे। तभी तेज प्रकाश से एक दिव्य देवी प्रकट हुईं। उन्होंने कहा, “हे राजन, मैं ब्रह्मदेव की मानस पुत्री देवसेना हूं। प्रकृति के छठे अंश से उत्पन्न होने के कारण लोग मुझे षष्ठी देवी कहते हैं। अगर तुम मेरी आराधना करोगे और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करोगे, तो तुम्हें सुखी और स्वस्थ पुत्र की प्राप्ति होगी।”

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
