छठ महापर्व का समय आते ही पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। यह पर्व सूर्य देव की उपासना के साथ-साथ छठी मैया की पूजा के लिए जाना जाता है, जिन्हें माता षष्ठी भी कहा जाता है। कहा जाता है कि छठी मैया ऋषि कश्यप और माता अदिति की मानस पुत्री हैं, और सूर्य देव की बहन हैं। कुछ स्थानों पर उन्हें देवसेना नाम से भी पूजा जाता है।


पौराणिक कथा में एक राजा प्रियंवद का उल्लेख आता है, जो बहुत धनवान और न्यायप्रिय था, लेकिन उसके जीवन में एक पीड़ा थी—उसे कोई संतान नहीं थी। दुखी होकर उसने महर्षि कश्यप से प्रार्थना की। महर्षि कश्यप ने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ किया और राजा-रानी को यज्ञ की आहूति से बनी खीर दी। इसे खाने के बाद रानी गर्भवती हुई, और कुछ समय बाद पुत्र जन्मा।


छठी मैया बच्चों की रक्षा करती हैं और मातृत्व के सुख का आशीर्वाद देती हैं। जो माता-पिता संतान की कामना करते हैं, वे छठ का व्रत रखते हैं। यह व्रत बहुत कठिन जरूर है, लेकिन इसमें श्रद्धा और विश्वास की गहराई होती है।

एक कथा के अनुसार, जब ब्रह्मदेव ने इस सृष्टि का निर्माण किया, तब प्रकृति ने अपने आप को छह भागों में बांट लिया। उन छह स्वरूपों के छठे अंश से देवी षष्ठी का प्रकट होना हुआ। इसलिए उन्हें छठी मैया कहा गया। माना जाता है कि जो लोग सच्चे मन से उनकी पूजा करते हैं, मां उन्हें संतान सुख प्रदान करती हैं और बच्चों की रक्षा करती हैं।

लेकिन जब बच्चे का जन्म हुआ, वह मृत था। यह देखकर राजा और रानी गहरे दुख में डूब गए। राजा अपने पुत्र के शव को लेकर श्मशान पहुंचे और वहीं प्राण त्यागने का विचार करने लगे। तभी तेज प्रकाश से एक दिव्य देवी प्रकट हुईं। उन्होंने कहा, “हे राजन, मैं ब्रह्मदेव की मानस पुत्री देवसेना हूं। प्रकृति के छठे अंश से उत्पन्न होने के कारण लोग मुझे षष्ठी देवी कहते हैं। अगर तुम मेरी आराधना करोगे और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करोगे, तो तुम्हें सुखी और स्वस्थ पुत्र की प्राप्ति होगी।”


राजा प्रियंवद ने देवी की बात मानकर व्रत रखा और श्रद्धा से षष्ठी देवी की पूजा की। देवी प्रसन्न हुईं और उन्हें एक सुंदर, स्वस्थ पुत्र का वरदान मिला। तभी से यह परंपरा पूरे भारत में फैल गई और लोग छठी मैया की पूजा करने लगे। माना जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से छठ व्रत करते हैं, सूर्य देव और षष्ठी माता उन पर कृपा बरसाते हैं। माता अपने भक्तों के परिवार को सुख, समृद्धि और संतान की रक्षा का वरदान देती हैं।

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Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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