नटराज मूर्ति में छिपा आध्यात्मिक संदेश ; कौन था 'अपस्मार' और क्यों वह नटराज के चरणों में दिखाया जाता है
नटराज की मूर्ति के नीचे दिखने वाला अपस्मार कौन है, उसकी उत्पत्ति, नाम का अर्थ और दार्शनिक महत्व क्या है—यह लेख अपस्मार के प्रतीकात्मक अर्थ, शैव परंपरा में उसकी भूमिका और अज्ञान पर ज्ञान की विजय के शाश्वत संदेश को गहराई से प्रस्तुत करता है।

'अपस्मार'
चोल काल से लेकर आधुनिक युग तक, दक्षिण भारतीय कांस्य मूर्तियों में अपस्मार की आकृति अनिवार्य रूप से शामिल रही है। उसकी मुड़ी हुई देह, भयभीत मुख और असहाय मुद्रा यह स्पष्ट करती है कि अज्ञान कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः वह चेतना के आगे झुकता है। यही कारण है कि नटराज की मूर्ति केवल धार्मिक नहीं, बल्कि दार्शनिक और सांस्कृतिक दस्तावेज भी मानी जाती है। अपस्मार आज भी प्रासंगिक है। वह आधुनिक समाज के अहंकार, अंधविश्वास और बौद्धिक जड़ता का प्रतीक बन चुका है। नटराज के चरणों के नीचे उसकी उपस्थिति यह संदेश देती है कि ज्ञान, विवेक और आत्मबोध के बिना सभ्यता आगे नहीं बढ़ सकती।
- अपस्मार कौन है हिंदू पौराणिक कथानटराज की मूर्ति के नीचे अपस्मार क्योंअपस्मार का अर्थ और महत्व शैव दर्शनअपस्मार असुर की उत्पत्ति कहानीनटराज अपस्मार प्रतीकात्मक अर्थApasmara demon Hindu mythology explanationWhy Apasmara under Nataraja statueApasmara meaning ignorance symbolismApasmara creation myth ShaivismNataraja statue philosophical meaning ApasmaraApasmara Hindu mythologyApasmara demon meaningNataraja Apasmara symbolismApasmara under NatarajaApasmara ignorance symbolApasmara myth originNataraja statue philosophyApasmara ShaivismApasmara dwarf demonApasmara spiritual meaningapasmara kon haiapasmara kya haiapasmara imagesnatraj murti apasmaranatraj ke pair ke niche kon haiwho is apasmaraapasmara historyapasmara storypratahkal newspratahkal daily

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
