अमेरिका के टेक्सास में सीनेट सीट के लिए होने वाला मुकाबला आस्था, धर्म और राजनीतिक विचारधाराओं की दो बिल्कुल अलग तस्वीरें पेश कर रहा है। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स तालारिको जहां प्रेम, मेल-मिलाप और सामाजिक करुणा की राजनीति का समर्थन कर रहे हैं, वहीं रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन टकराव और रूढ़िवादी विचारधारा के पक्षधर हैं। दोनों नेता ईसाई धर्म का हवाला देते हुए चुनाव मैदान में हैं। 3 नवंबर को होने वाला यह मुकाबला अमेरिकी कांग्रेस में नियंत्रण के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

37 वर्षीय जेम्स तालारिको पूर्व शिक्षक और प्रेस्बिटेरियन पादरी बनने की तैयारी कर रहे धर्मशास्त्र के विद्यार्थी हैं। उनके सामने 63 वर्षीय केन पैक्सटन हैं, जो टेक्सास के अटॉर्नी जनरल और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक के रूप में पहचाने जाते हैं। राजनीतिक विवादों और वर्षों से सामने आ रहे आरोपों के बावजूद पैक्सटन ने अपना राजनीतिक प्रभाव बनाए रखा है। टेक्सास में 1994 के बाद से किसी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ने राज्यव्यापी चुनाव नहीं जीता है। ऐसे में इस चुनाव का प्रतिस्पर्धी बनना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तालारिको के राजनीतिक व्यक्तित्व की नींव उनके बचपन से जुड़ी बताई जाती है। उनके बचपन से परिचित पादरी जिम रिग्बी के अनुसार, चर्च के डेकेयर सेंटर में रहते हुए तालारिको बच्चों के बीच होने वाले झगड़ों को रोकने के लिए हस्तक्षेप करते थे। रिग्बी ने ही उनका बपतिस्मा कराया था और उनके माता-पिता का विवाह भी संपन्न कराया था। उन्हें याद है कि तालारिको बचपन से ही लोगों के बीच शांति स्थापित करने वाले स्वभाव के थे। दशकों बाद यही विशेषता उनकी राजनीतिक पहचान का अहम हिस्सा बन गई है।

मिडिल स्कूल में शिक्षक और एक गैर-लाभकारी संस्था के निदेशक के रूप में काम कर चुके तालारिको 2018 में टेक्सास हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए निर्वाचित हुए। उन्होंने प्रगतिशील राजनीति, बाइबिल की शिक्षाओं और अमेरिका के धनी अभिजात वर्ग की आलोचना को अपने भाषणों का हिस्सा बनाया। उनका कहना है, "मैं हमेशा किसी भी राजनीतिक दल से पहले टेक्सास को रखूंगा।"

प्रेस्बिटेरियन धर्मशास्त्र के विद्यार्थी तालारिको ईसा मसीह की पड़ोसी से प्रेम करने की शिक्षा से प्रेरणा लेते हैं। उनका तर्क है कि धार्मिक आस्था गरीबों, प्रवासियों और हाशिये पर रहने वाले समुदायों के प्रति करुणा की मांग करती है। उन्होंने ईसाई राष्ट्रवाद की आलोचना की है और सार्वजनिक स्कूलों में सरकार द्वारा प्रायोजित धार्मिक प्रदर्शनों का विरोध किया है। इस तरह उन्होंने रूढ़िवादी ईसाइयों के सामने उनके अपने धार्मिक सिद्धांतों के आधार पर सवाल उठाए हैं।

तालारिको के राजनीतिक एजेंडे में गर्भपात के अधिकारों और आर्थिक समानता को बढ़ावा देने का समर्थन शामिल है। साथ ही, वह उन मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं जो राजनीतिक दलों के बीच लगातार बढ़ती शत्रुता से परेशान हैं। उनकी संवादात्मक शैली और धार्मिक ग्रंथों पर पकड़ के कारण सोशल मीडिया पर उनके भाषणों के वीडियो व्यापक रूप से प्रसारित हुए हैं। वर्ष 2025 में कॉमेडियन जो रोगन के लोकप्रिय पॉडकास्ट में उनकी दो घंटे की उपस्थिति ने उन्हें पारंपरिक डेमोक्रेटिक समर्थकों से आगे भी पहचान दिलाई।

हालांकि, तालारिको की प्रगतिशील धार्मिक व्याख्याओं को धार्मिक रूढ़िवादियों की कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा है। विशेष रूप से गर्भपात और LGBTQ अधिकारों पर उनके विचार विवाद का विषय बने। ईश्वर को "नॉन-बाइनरी" बताने के उनके सुझाव पर ईशनिंदा के आरोप लगाए गए। वहीं, ट्रांसजेंडर मुद्दों पर हाल में अपनाई गई उनकी अधिक सतर्क भाषा को लेकर उनके कुछ समर्थकों ने भी सवाल उठाए हैं।

अपना राजनीतिक आधार व्यापक बनाने के प्रयास में तालारिको ने टेक्सास के तेल उद्योग का बचाव किया है और पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन की आव्रजन नीतियों के कुछ पहलुओं की आलोचना की है। डेमोक्रेटिक प्राइमरी में उन्होंने अधिक आक्रामक रुख रखने वाली कांग्रेस सदस्य जैस्मिन क्रॉकेट को हराया। इस दौरान उन्होंने "प्रेम की राजनीति" का वादा किया।

दूसरी ओर, केन पैक्सटन का राजनीतिक सफर कई बार संकट में घिरा, लेकिन वह हर बार अपनी स्थिति मजबूत करने में सफल रहे। टेक्सास के अटॉर्नी जनरल के रूप में उन्होंने आपराधिक आरोपों, महाभियोग और नुकसान पहुंचाने वाले खुलासों का सामना किया। इसके बावजूद वह ट्रंप के 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' (MAGA) आंदोलन के सबसे पहचाने जाने वाले समर्थकों में शामिल रहे।

बायलर यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया से शिक्षा प्राप्त करने वाले पैक्सटन ने 2003 में टेक्सास की विधायिका में प्रवेश किया। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के भीतर अधिक दक्षिणपंथी रुख अपनाते हुए अपनी राजनीतिक पहचान बनाई। वर्ष 2015 में अटॉर्नी जनरल बनने के बाद उन्होंने इस पद का इस्तेमाल डेमोक्रेटिक सरकारों और प्रगतिशील नीतियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए किया।

आव्रजन नीतियों, गर्भपात तक पहुंच, पर्यावरणीय नियमों और बाइडेन प्रशासन को निशाना बनाने वाले उनके मुकदमों ने उन्हें जमीनी स्तर के रूढ़िवादी समर्थकों के बीच लोकप्रिय बनाया। पैक्सटन ने 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में हार के बाद ट्रंप के नतीजों को पलटने के प्रयासों का भी समर्थन किया। इससे राष्ट्रपति के प्रति सबसे अधिक वफादार समर्थकों के बीच उनकी स्थिति और मजबूत हुई।

तालारिको की तरह पैक्सटन भी अपनी राजनीति में धर्म को केंद्रीय स्थान देते हैं, लेकिन ईसाई धर्म की उनकी व्याख्या अलग है। वह पारंपरिक नैतिक मूल्यों और ऐसे राष्ट्र की रक्षा पर जोर देते हैं, जिसके बारे में उनका मानना है कि उसकी स्थापना बाइबिल के सिद्धांतों पर हुई थी। वर्ष 2025 में उन्होंने कहा था, "टेक्सास की कक्षाओं में हम चाहते हैं कि ईश्वर का वचन खोला जाए, दस आज्ञाओं को प्रदर्शित किया जाए और प्रार्थनाएं की जाएं।"

हालांकि, पैक्सटन की राजनीतिक मजबूती के बावजूद विवाद उनका पीछा करते रहे हैं। वर्ष 2023 में रिपब्लिकन-नियंत्रित टेक्सास हाउस ने भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों को लेकर उनके खिलाफ महाभियोग चलाया, लेकिन राज्य सीनेट ने उन्हें आरोपों से बरी कर दिया।

प्रतिभूति धोखाधड़ी से जुड़े लंबे समय से चल रहे आरोप भी ऐसे समझौते के तहत निपटाए गए, जिसमें गलत काम स्वीकार किए बिना उन्हें क्षतिपूर्ति और सामुदायिक सेवा की शर्तें पूरी करनी थीं। हाल के दिनों में बेवफाई के आरोपों के बीच उनका वैवाहिक संबंध भी टूट गया। नई मीडिया रिपोर्टों में धनी दानदाताओं और कारोबारियों के साथ उनके संबंधों पर भी सवाल उठाए गए हैं। पैक्सटन ने गलत काम करने से इनकार किया है और अपने कानूनी तथा राजनीतिक विवादों को प्रतिष्ठान से जुड़े लोगों की ओर से उन्हें नष्ट करने के प्रयासों के रूप में पेश किया है।

उनके समर्थक निजी आचरण से जुड़े सवालों के बावजूद उनके साथ खड़े रहे हैं। वे राजनीतिक लड़ाइयों में पैक्सटन के आक्रामक रुख को महत्व देते हैं। इसी समर्थन ने मई में रिपब्लिकन प्राइमरी के दूसरे दौर में उन्हें चार बार के मौजूदा सीनेटर जॉन कॉर्निन को 28 प्रतिशत अंकों के अंतर से हराने में मदद की। इस मुकाबले में ट्रंप ने खुलकर पैक्सटन का समर्थन किया था।

कॉर्निन पर पैक्सटन की यह जीत दिखाती है कि ट्रंप के राजनीतिक आंदोलन ने टेक्सास की रिपब्लिकन राजनीति को किस हद तक बदल दिया है। अब 3 नवंबर का सीनेट चुनाव प्रेम और मेल-मिलाप पर आधारित राजनीति तथा टकराव और रूढ़िवाद के बीच वैचारिक मुकाबले के रूप में सामने है। इसके नतीजे का महत्व केवल टेक्सास तक सीमित नहीं रहेगा, क्योंकि यह अमेरिकी कांग्रेस में सत्ता के संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

Pratahkal Bureau

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