सेंट मैरी चर्च में रिमेंबरेंस डे पर विशेष पोपी प्रदर्शनी का आयोजन
प्रदर्शनी में प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के वीरों के बलिदान के साथ मानवीय कहानियों और व्यक्तिगत अनुभवों को दर्शाया जाएगा।

वारशैश के सेंट मैरी चर्च में रिमेंबरेंस डे की प्रदर्शनी हेतु पोपी फूल सजाते स्वयंसेवक।
इंग्लैंड के वारशैश स्थित सेंट मैरी चर्च में रिमेंबरेंस डे (स्मृति दिवस) के अवसर पर युद्ध में अपनी जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि देने के लिए विशेष पोपी (खसखस के फूल) प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। इस आयोजन के माध्यम से प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के साथ-साथ उसके बाद हुए संघर्षों में मारे गए लोगों के बलिदान और उनकी मानवीय कहानियों को याद किया जाएगा। चर्च 7 और 8 नवंबर को आम लोगों के लिए खुला रहेगा।
चर्च ऑफ इंग्लैंड के पोर्ट्समाउथ डायोसिस की ओर से प्रकाशित जानकारी के अनुसार, रिमेंबरेंस डे पर उन लोगों को याद किया जाता है जिन्होंने स्वतंत्रता और जीवनशैली की रक्षा के लिए अपने प्राण गंवाए। यह अवसर केवल प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध में शहीद हुए लोगों को याद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके बाद हुए विभिन्न संघर्षों में जान गंवाने वालों के बलिदान को भी स्मरण करने का समय है।
इस आयोजन का प्रमुख प्रतीक पोपी फूल होगा। परंपरागत रूप से इसे प्रथम विश्व युद्ध के दौरान उत्तरी फ्रांस और बेल्जियम की कीचड़ भरी खाइयों में उगने वाला एकमात्र फूल माना जाता है। इसी प्रतीक के माध्यम से सेंट मैरी चर्च में विशेष पोपी प्रदर्शनी तैयार की जा रही है।
चर्च के आसपास और भीतर ऊन तथा कपड़ों से बनाए गए पोपी फूल प्रदर्शित किए जाएंगे। इनमें से कुछ फूल उन महिलाओं ने तैयार किए हैं, जो नियमित रूप से चर्च में हस्तशिल्प गतिविधियों के लिए एकत्रित होती हैं। इन फूलों को पूरे चर्च में सजाया जाएगा, ताकि वहां आने वाले लोग प्रदर्शनी को देख सकें।
पोपियों की प्रदर्शनी के साथ मानवीय कहानियों पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इसमें प्रथम विश्व युद्ध के एक प्रेरणादायक सैन्य चिकित्साकर्मी, नाजी शासन के एक पीड़ित और युद्ध में शामिल होने वाले कुछ सबसे कम उम्र के लड़कों की कहानियां प्रस्तुत की जाएंगी। इन कहानियों का उद्देश्य स्मृति दिवस के पीछे छिपे व्यक्तिगत अनुभवों और मानवीय पहलुओं को सामने लाना है।
प्रदर्शनी में 17 वर्षीय जॉर्ज ड्रवीएगा की यात्रा को दर्शाने वाला एक नक्शा भी शामिल होगा। जॉर्ज ने पूर्वी यूरोप में कहीं स्थित अपने घर से यात्रा शुरू की थी। इसके बाद वह फ्रांस में कुछ समय रहा और वहां से जिब्राल्टर पहुंचा। फिर डी-डे आक्रमण के समय तक वह ब्रिटेन पहुंच गया था। उसकी यात्रा की कहानी अधूरी है, जैसा कि ऐसी कई कहानियों के साथ होता है। यह सफर मुख्य रूप से पैदल और अंधेरे में तय किया गया था।
7 और 8 नवंबर को चर्च में आयोजित कार्यक्रमों में वारशैश वेटरन्स ग्रुप, मदर्स यूनियन और वारशैश हेरिटेज सोसाइटी के सदस्य भी शामिल होंगे। शनिवार की दोपहर आगंतुकों के लिए चाय की व्यवस्था की जाएगी, जबकि रविवार की दोपहर लोग अपने दिवंगत प्रियजनों की स्मृति में मोमबत्तियां जला सकेंगे।
इसके बाद 11 नवंबर को रिमेंबरेंस डे के दिन हुक-विथ-वारशैश सीओई प्राइमरी स्कूल के विद्यार्थियों को चर्च में आमंत्रित किया जाएगा, जहां उन्हें स्मृति दिवस के महत्व और उसके वास्तविक अर्थ के बारे में जानकारी दी जाएगी।
आयोजकों ने बताया कि 7 नवंबर, शनिवार को चर्च सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक और 8 नवंबर, रविवार को दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक खुला रहेगा। आगंतुक अपनी सुविधानुसार कम या अधिक समय तक यहां रह सकते हैं। प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रहेगा और चर्च में मौजूद सदस्य आगंतुकों का स्वागत करने के साथ उन्हें प्रदर्शनी तथा उससे जुड़ी कहानियों के बारे में जानकारी देंगे।
सेंट मैरी चर्च, चर्च रोड, वारशैश, SO31 9GF में आयोजित यह कार्यक्रम युद्ध में जान गंवाने वालों के बलिदान को याद करने के साथ उनकी अनकही मानवीय कहानियों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर बनेगा।

Pratahkal Bureau
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