रुक्मिणी अष्टमी पर विशेष अनुष्ठान ; जानें व्रत-पूजा से जुड़ी परंपराएं और पौराणिक कथा
रुक्मिणी अष्टमी 2026 भगवान श्रीकृष्ण की अर्धांगिनी देवी रुक्मिणी के जन्मोत्सव के रूप में 8 जनवरी को मनाई जाएगी। पौष मास की कृष्ण अष्टमी पर व्रत, पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से वैवाहिक सुख, समृद्धि और भक्ति की कामना की जाती है।

रुक्मिणी अष्टमी 2026
पौष मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि पर मनाया जाने वाला रुक्मिणी अष्टमी का पर्व सनातन परंपरा में विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण की प्रमुख पटरानी और माता लक्ष्मी के अवतार मानी जाने वाली देवी रुक्मिणी के जन्मोत्सव के रूप में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व गुरुवार, 8 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा। हालांकि, चंद्र आधारित पंचांग की गणना के कारण कुछ कैलेंडरों में इसकी तिथि को लेकर भिन्नता भी देखी जाती है, जो इस पर्व की खगोलीय और पंचांग आधारित प्रकृति को रेखांकित करती है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, रुक्मिणी अष्टमी पौष मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आती है। यही वह दिन माना जाता है जब विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी ने पृथ्वी पर जन्म लिया था। धार्मिक मान्यता है कि देवी रुक्मिणी ने भगवान कृष्ण को अपने पति के रूप में पाने के लिए कठिन तप और अटूट भक्ति की थी। उनकी यह भक्ति और दृढ़ संकल्प ही इस पर्व का मूल भाव है, जो प्रेम, समर्पण और धर्मनिष्ठ विवाह का प्रतीक माना जाता है।
रुक्मिणी अष्टमी के दिन देशभर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। श्रद्धालु प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं और दिनभर उपवास रखते हैं। मंदिरों और घरों में भगवान कृष्ण और देवी रुक्मिणी की संयुक्त पूजा की जाती है। फूल, धूप, दीप, नैवेद्य और विशेष रूप से खीर का भोग अर्पित किया जाता है। विवाहित महिलाएं इस दिन विशेष रूप से व्रत रखकर अपने वैवाहिक जीवन की सुख-शांति, पति की दीर्घायु और पारिवारिक समृद्धि की कामना करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं उत्तम वर की प्रार्थना करती हैं।
इस पर्व से जुड़ी पौराणिक कथा भी अत्यंत प्रेरणादायक है। कथा के अनुसार, रुक्मिणी का विवाह शिशुपाल से तय किया गया था, लेकिन उनका मन पूर्णतः भगवान कृष्ण में रमा हुआ था। उन्होंने साहसपूर्वक कृष्ण को संदेश भेजा और उनसे विवाह की इच्छा प्रकट की। कृष्ण ने रुक्मिणी का हरण कर उनसे विवाह किया, जो धर्म, प्रेम और स्त्री की स्वतंत्र इच्छा का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि रुक्मिणी अष्टमी को दांपत्य जीवन में आपसी सम्मान और समर्पण का पर्व भी कहा जाता है।
रुक्मिणी अष्टमी का आयोजन विशेष रूप से द्वारका, मथुरा, वृंदावन और विदर्भ क्षेत्र में भव्य रूप से किया जाता है। गुजरात के द्वारका स्थित रुक्मिणी देवी मंदिर में इस दिन विशेष सजावट और धार्मिक कार्यक्रम होते हैं, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
