स्कंद षष्ठी 2026 का पावन पर्व 19 जून को मनाया जाएगा, जिसमें भगवान कार्तिकेय की आराधना, व्रत विधि, तिथि समय और धार्मिक महत्व का विशेष वर्णन है। यह व्रत साहस, विजय और बाधाओं के नाश का प्रतीक माना जाता है, जो भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है।

सनातन परंपरा में भगवान स्कंद, जिन्हें कार्तिकेय, मुरुगन या सुब्रमण्य के नाम से भी जाना जाता है, की उपासना को अत्यंत फलदायी और शक्तिदायक माना गया है। इन्हीं आराध्य देव को समर्पित पावन पर्व स्कंद षष्ठी 2026 में 19 जून, शुक्रवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। यह पर्व ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर मनाया जाता है, जिसे भगवान कार्तिकेय की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्कंद षष्ठी, जिसे कंद षष्ठी भी कहा जाता है, प्रत्येक माह शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है, लेकिन ज्येष्ठ मास की षष्ठी का विशेष आध्यात्मिक महत्व होता है। यह दिन भगवान स्कंद की विजय और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है, जो जीवन में आने वाले संकटों और बाधाओं पर विजय का संदेश देता है। वर्ष 2026 में स्कंद षष्ठी की तिथि 19 जून को शाम लगभग 4 बजकर 59 मिनट पर आरंभ होगी और इसका समापन 20 जून को दोपहर लगभग 3 बजकर 46 मिनट पर होगा। यह पावन काल भक्तों के लिए विशेष पूजा-अर्चना और व्रत साधना का अवसर प्रदान करता है, जिसे अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

स्कंद षष्ठी व्रत की विधि के अनुसार, श्रद्धालु इस दिन प्रातःकाल शीघ्र उठकर स्नान कर शरीर और मन की शुद्धि करते हैं। इसके पश्चात संकल्प लेकर भगवान स्कंद की आराधना की जाती है, जो घर अथवा मंदिर में विधिपूर्वक संपन्न होती है। व्रत के दौरान भक्त अपनी क्षमता अनुसार पूर्ण या आंशिक उपवास रखते हैं। आंशिक उपवास में फलाहार और दूध का सेवन किया जाता है, जबकि अनाज, तामसिक भोजन, प्याज, लहसुन, शराब और अन्य नशे के पदार्थों का पूर्णतः त्याग किया जाता है।

इस व्रत में स्कंद षष्ठी कवच का पाठ अत्यंत शुभ माना गया है, जिसे श्रद्धालु भक्तिभाव के साथ करते हैं। साथ ही “ॐ शरवणभवाय नमः” मंत्र का 108 बार जाप भगवान कार्तिकेय की कृपा प्राप्त करने का प्रमुख साधन माना जाता है। पूजा के दौरान पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित कर भक्ति भाव से आराधना की जाती है। दिनभर भक्त मानसिक शांति, संयम और सकारात्मकता का पालन करते हुए भजन-कीर्तन और ध्यान में लीन रहते हैं। संध्या समय विशेष पूजा-अर्चना के साथ व्रत का समापन किया जाता है, जो परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार अलग-अलग समय पर संपन्न होता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्कंद षष्ठी का व्रत भगवान मुरुगन की उस विजय का प्रतीक है जिसमें उन्होंने असुर सोरपद्मन का वध कर धर्म की स्थापना की थी। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देता है और जीवन में साहस, अनुशासन तथा आत्मबल को सुदृढ़ करता है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, मंगलकारी ग्रह दोषों का शमन होता है और व्यक्ति को शिक्षा, करियर एवं जीवन में सफलता प्राप्त होती है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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