प्रतापगढ़ के सियाराम उमरवैश्य ने 2018 में जमीन बेचकर मंदिर निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये का दान दिया था।

अयोध्या में भगवान श्री राम के भव्य मंदिर निर्माण का कार्य संपूर्ण आस्था और जन-सहयोग का प्रतीक माना गया है। इस निर्माण प्रक्रिया में देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा के अनुसार योगदान दिया है। इन्हीं दानदाताओं में प्रतापगढ़ जिले के 75 वर्षीय निवासी सियाराम उमरवैश्य भी शामिल हैं, जिन्होंने वर्ष 2018 में राम मंदिर निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण धनराशि दान में दी थी। उस समय उनके इस बड़े योगदान की व्यापक चर्चा हुई थी और उन्हें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में विशेष रूप से आमंत्रित भी किया गया था।

वर्तमान में, श्री राम मंदिर में चढ़ावे और उसके प्रबंधन से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले चर्चा में हैं। इन खबरों को लेकर सियाराम उमरवैश्य ने अपनी गहरी चिंता और निराशा व्यक्त की है। उनका कहना है कि उन्होंने यह धनराशि अपनी निजी भूमि बेचकर जुटाई थी, जिसका उद्देश्य भविष्य में अपने और अपने परिवार के आर्थिक हितों की सुरक्षा करना था। सियाराम के अनुसार, उन्होंने पूरी आस्था के साथ यह राशि मंदिर निर्माण हेतु समर्पित कर दी थी, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने उन्हें अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया है।

सियाराम उमरवैश्य ने स्पष्ट किया कि उस समय उनके शुभचिंतकों ने उन्हें इतनी बड़ी राशि दान करने से मना किया था, परंतु उन्होंने अपनी निष्ठा के चलते उस सलाह को अनसुना कर दिया। उनका मानना है कि चढ़ावे के रूप में एकत्रित धनराशि के प्रबंधन और उसमें संभावित अनियमितताओं के समाचार उनके विश्वास के विपरीत हैं। उन्होंने इस मामले में ट्रस्ट के पदाधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं और कहा है कि इस तरह के कृत्यों से जनभावनाओं को ठेस पहुंचती है।

सियाराम ने आगे कहा कि जिन लोगों पर उन्हें अटूट विश्वास था, यदि वे ही धन के दुरुपयोग जैसे कार्यों में संलिप्त पाए जाते हैं, तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि धर्म और मंदिर की पवित्रता सर्वोपरि है और किसी भी प्रकार का गबन या अनियमितता स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि इस पूरे मामले की उचित जांच होनी चाहिए ताकि सत्य सामने आ सके और मंदिर की मर्यादा बनी रहे।

अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए सियाराम ने कहा कि सनातन धर्म में आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर श्रद्धा का केंद्र है और इसे किसी भी प्रकार के विवाद या संशय से दूर रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा दी गई राशि उस समय की उनकी निस्वार्थ भावना का प्रमाण थी, जिसका उद्देश्य केवल मंदिर का निर्माण सुनिश्चित करना था। बहरहाल, मंदिर प्रबंधन और चढ़ावे से जुड़े विवादों ने दानदाताओं के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जो सार्वजनिक चर्चा का विषय बने हुए हैं।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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