अमृत वर्षा वाली इस रात सिर्फ 50 मिनट का है खीर रखने का शुभ मुहूर्त, जानें समय और पूजा के खास नियम|
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने के लिए निशिता काल का समय और पूजा का महत्व जानें।

शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने के शुभ मुहूर्त की जानकारी देने वाला ग्राफिकल बैनर।
शरद पूर्णिमा का पावन पर्व हिंदू धर्म में विशेष स्थान रखता है, जिसे कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की यह विशेष रात बेहद खास होती है क्योंकि इस दिन माता लक्ष्मी पृथ्वी लोक पर भ्रमण करने के लिए आती हैं| ऐसा माना जाता है कि मां लक्ष्मी यह देखती हैं कि कौन भक्त उनकी सच्ची श्रद्धा से आराधना कर रहा है| इसी धार्मिक भावना के चलते बहुत से लोग इस पूरी रात जागरण करते हैं और विधि-विधान के साथ माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करते हैं| इस दिन शाम के समय अपने घर के मंदिर में शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करना चाहिए और मां लक्ष्मी के विभिन्न मंत्रों का जाप करना बेहद शुभ माना जाता है| इसके अलावा, मां लक्ष्मी को भोग के रूप में खीर, विभिन्न प्रकार की मिठाइयां और ताजे फल अर्पित किए जाते हैं| इस पवित्र दिन पर भगवान सत्यनारायण की कथा सुनने और करने की भी पुरानी परंपरा चली आ रही है, जिससे घर-परिवार में सुख और शांति बनी रहती है.
चंद्रमा की सोलह कलाएं और खीर रखने की परंपरा
आज कार्तिक पूर्णिमा के इस व्रत के अवसर पर चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूरी तरह परिपूर्ण होते हैं| इस खास रात में चंद्रमा की चांदनी में दूध और चावल से बनी खीर को खुले आसमान के नीचे रखने का विशेष विधान और महत्व बताया गया है| पंडित राकेश झा के अनुसार, ऐसी मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों से अमृत की वर्षा होती है| जब यह चांदनी खीर पर पड़ती है, तो वह साधारण खीर अमृत के समान गुणकारी बन जाती है| पंडित जी का यह भी कहना है कि इस खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखने के लिए सही और शुभ समय का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. खीर को खुले में रखते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि बर्तन को किसी साफ मलमल के या पतले सूती कपड़े से अच्छी तरह ढक दिया जाए, ताकि चंद्रमा की शीतल रोशनी और उसके गुण बिना किसी रुकावट के खीर के अंदर आसानी से समा सकें|
चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने का सटीक शुभ मुहूर्त
शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा की चांदनी में खीर को स्थापित करने के लिए पंचांग के अनुसार एक बहुत ही सीमित और महत्वपूर्ण समय निर्धारित किया गया है. पंचांग की गणना के मुताबिक, इस कार्य के लिए सबसे उत्तम माना जाने वाला निशिता काल का समय रात में 11 बजकर 40 मिनट से शुरू होगा और यह समयावधि रात को 12 बजकर 31 मिनट पर समाप्त हो जाएगी| इस प्रकार, इस साल श्रद्धालुओं के पास चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने के लिए कुल 50 मिनट का ही मुख्य शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेगा, जिसमें सही विधि और नियमों का पालन करते हुए खीर को खुले आसमान के नीचे रखा जा सकता है ताकि उसका धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ पूरी तरह से प्राप्त हो सके|
शरद पूर्णिमा की पूजा के लिए उत्तम चौघड़िया मुहूर्त
शरद पूर्णिमा के इस पावन पर्व पर मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की विधिवत आराधना करने के लिए प्रदोष काल के समय को सबसे ज्यादा उत्तम और श्रेष्ठ माना गया है| पूजा-पाठ को संपन्न करने के लिए पंचांग के अनुसार कुछ खास चौघड़िया मुहूर्त भी बताए गए हैं, जिनमें देवी-देवताओं की उपासना करना अत्यधिक फलदायी होता है| पहला शुभ मुहूर्त शाम को 5 बजकर 42 मिनट से शुरू होकर 7 बजकर 18 मिनट तक का रहेगा, जिसे शुभ चौघड़िया कहा जाता है. इसके तुरंत बाद दूसरा महत्वपूर्ण मुहूर्त शाम को 7 बजकर 18 मिनट से शुरू होकर रात 8 बजकर 54 मिनट तक रहेगा, जिसे अमृत चौघड़िया माना गया है. इन दोनों ही तयशुदा शुभ और मंगलकारी चौघड़िया मुहूर्तों के दौरान यदि भक्त अपने घरों में पूजा-पाठ करते हैं, तो इससे माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है तथा घर-परिवार में हमेशा सुख-समृद्धि और बरकत बनी रहती है|

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
