सफला एकादशी व्रत विधि 2026: जानें कैसे करें भगवान विष्णु की आराधना और व्रत की परंपरा
8 जनवरी 2026 को मनाई जाने वाली सफला एकादशी का धार्मिक महत्व, व्रत विधि और एकादशी उपवास के चार प्रमुख प्रकार—जलाहर, क्षीरभोजी, फलाहारी और नक्तभोजी—का विस्तृत विवरण। यह पर्व संयम, भक्ति और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है।

सफला एकादशी व्रत विधि
हिंदू पंचांग के अनुसार पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाने वाली सफला एकादशी इस वर्ष 8 जनवरी 2026 को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाएगी। यह एकादशी विशेष रूप से भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है और इसका महत्व केवल उपवास तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मसंयम, शुद्ध आचरण और आध्यात्मिक जागरण से भी जुड़ा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होता है।
एकादशी व्रत के चार प्रमुख प्रकार-
1. जलाहर व्रत:
- इस व्रत में पूरे दिन केवल जल का सेवन किया जाता है।
- यह सबसे कठोर व्रत माना जाता है।
- सामान्यतः निर्जला एकादशी पर इसका अधिक प्रचलन है,
- लेकिन श्रद्धालु चाहें तो किसी भी एकादशी पर इसका पालन कर सकते हैं।
- इस व्रत में दूध और दूध से बने सभी पदार्थों का सेवन किया जाता है।
- ‘क्षीर’ का अर्थ यहाँ केवल दुग्ध और दुग्ध-उत्पादों से है।
- अनाज, फल, सब्जियां और अन्य खाद्य पदार्थ इसमें वर्जित माने जाते हैं।
- इस व्रत में केवल फल और चुनिंदा सूखे मेवों का सेवन किया जाता है।
- आम, अंगूर, केला जैसे फल तथा बादाम और पिस्ता जैसे मेवे स्वीकार्य हैं।
- पत्तेदार सब्जियों और अनाज का सेवन इस व्रत में निषिद्ध माना जाता है।
- दिनभर उपवास रखकर सूर्यास्त से ठीक पहले एक समय भोजन किया जाता है।
- इस भोजन में सभी प्रकार के अनाज, दालें, गेहूं, चावल और फलियां वर्जित रहती हैं।
- भोजन पूरी तरह सात्विक और सीमित मात्रा में ग्रहण किया जाता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
