सनातन धर्म में प्रत्यक्ष देवता माने जाने वाले भगवान भास्कर (सूर्य देव) की उपासना का सबसे पावन पर्व 'रथसप्तमी' कल, यानी 25 जनवरी 2026 (रविवार) को पूरी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। माघ महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व को 'सूर्य जयंती' या 'माघ सप्तमी' के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह वही दिन है जब भगवान सूर्य ने अपने दिव्य तेज से पहली बार पूरे ब्रह्मांड को आलोकित करना शुरू किया था।

ब्रह्मांडीय ऊर्जा और रथसप्तमी का गहरा अर्थ
रथसप्तमी का शाब्दिक और आध्यात्मिक अर्थ अत्यंत गहरा है। 'रथ' भगवान सूर्य के वाहन का प्रतीक है, और 'सप्तमी' सातवें दिन को दर्शाती है। शास्त्रों में वर्णित है कि सूर्य देव के रथ को सात घोड़े खींचते हैं। ये सात घोड़े सप्ताह के सात दिनों और इंद्रधनुष के सात रंगों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो जीवन में निरंतरता और विविधता का संदेश देते हैं।

धार्मिक दृष्टिकोण से, रथसप्तमी वह दिन माना जाता है जब सूर्य देव अपने रथ को दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पूर्वी दिशा की ओर मोड़ते हैं। यह दिशा परिवर्तन न केवल मौसम में बदलाव लाता है, बल्कि वसंत ऋतु के आगमन और प्रकृति में नवजीवन के संचार का भी संकेत देता है। इसे उत्तरायण की पूर्णता और ग्रीष्म ऋतु की आहट के रूप में भी देखा जाता है।


मुख्य विवरण

  • तिथि: यह पर्व हिंदू कैलेंडर के अनुसार माघ महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है।
  • महत्व: माना जाता है कि इसी दिन भगवान सूर्य ने पूरे ब्रह्मांड को प्रकाशित करना शुरू किया था। इसे सूर्य देव का जन्म दिवस भी माना जाता है।

'रथसप्तमी' का अर्थ

इस दिन का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है:

  • रथ (Ratha): भगवान सूर्य का वाहन, जिसे 7 घोड़े खींचते हैं। ये 7 घोड़े सप्ताह के 7 दिनों और इंद्रधनुष के 7 रंगों का प्रतीक माने जाते हैं।
  • सप्तमी (Saptami): यह तिथि (सातवां दिन) को दर्शाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सूर्य देव अपने रथ को उत्तर-पूर्वी दिशा की ओर मोड़ते हैं, जो मौसम में बदलाव और वसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है।


रथसप्तमी के दिन भगवान सूर्य की आराधना आरोग्य, आयु और समृद्धि के लिए की जाती है। इसे विधि-विधान से करने के लिए आप निम्नलिखित चरणों का पालन कर सकते हैं:

1. स्नान (अरुणोदय स्नान)

रथसप्तमी पर सूर्योदय के समय (अरुणोदय) स्नान का विशेष महत्व है।

  • समय: सूर्योदय से पूर्व उठें और स्नान करें।
  • विधि: पारंपरिक रूप से, स्नान करते समय सिर और कंधों पर आक (अर्क) के 7 पत्ते और अक्षत (चावल) रखे जाते हैं।
  • श्लोक: स्नान के समय सूर्य का ध्यान करते हुए मन में प्रार्थना करें कि यह स्नान आपके रोगों और पापों का नाश करे।

2. अर्घ्य अर्पण

स्नान के बाद उगते हुए सूर्य को जल अर्पित करना सबसे मुख्य अनुष्ठान है।

  • सामग्री: एक तांबे के लोटे में शुद्ध जल लें। उसमें रोली (लाल चंदन), लाल फूल, अक्षत (चावल), थोड़ा गुड़ और तिल मिलाएं।
  • अर्पण विधि: पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हों और दोनों हाथों को ऊपर उठाकर धीरे-धीरे जल की धारा प्रवाहित करें। जल गिरते समय सूर्य देव की ओर देखें।
  • मंत्र: अर्घ्य देते समय "ॐ सूर्याय नमः" या "ॐ घृणि सूर्याय नमः" का जाप करें।

3. पूजा और दीपक

  • दीप दान: तुलसी के पौधे या घर के मंदिर में घी का दीपक जलाएं।
  • रंगोली: आंगन में या पूजा स्थल पर रथ के प्रतीक के रूप में एक रंगोली बनाएं (जिसमें 7 घोड़ों का चित्रण हो सकता है) और उसकी पूजा करें।
  • नैवेद्य (भोग): सूर्य देव को खीर या गुड़-चावल (मीठा भात) का भोग लगाएं। ऐसा माना जाता है कि दूध को मिट्टी के बर्तन में उबाला जाता है ताकि वह सूर्य की दिशा में उफन कर गिरे, जिसे शुभ माना जाता है।

4. मंत्र जाप और पाठ

पूजा के दौरान या बाद में निम्नलिखित स्तोत्रों का पाठ करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है:

  • आदित्य हृदय स्तोत्र: यह शत्रुओं पर विजय और स्वास्थ्य प्राप्ति के लिए बहुत शक्तिशाली है।
  • सूर्य अष्टकम: सूर्य देव की स्तुति।
  • गायत्री मंत्र: मन की शांति और बुद्धि के लिए।

5. दान

पूजा संपन्न करने के बाद, अपनी क्षमता अनुसार गरीबों या ब्राह्मणों को गेहूं, गुड़, तांबे के बर्तन या लाल वस्त्र का दान करना शुभ माना जाता है।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

Next Story