कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रमा एकादशी का व्रत रखा जाता है। पद्मपुराण और हिंदू धर्म में इस तिथि का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना और व्रत करने का शास्त्रीय विधान है। मान्यता है कि दिवाली से कुछ दिन पहले आने वाली इस एकादशी का व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि के योग बनते हैं और पाप नष्ट होते हैं। हालांकि, इस बार तिथि दो दिन पड़ने के कारण लोगों के बीच इसकी सही तारीख को लेकर दुविधा बनी हुई है।

रमा एकादशी की सही तिथि और मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 4 नवंबर, बुधवार को सुबह 11 बजकर 04 मिनट पर होगी। वहीं, यह तिथि अगले दिन यानी 5 नवंबर, गुरुवार को सुबह 10 बजकर 36 मिनट पर समाप्त होगी।

पंडित राकेश झा के अनुसार, शास्त्रीय नियमों के तहत जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी तिथि मौजूद होती है, उसी दिन व्रत रखा जाता है। इस प्रकार उदया तिथि की मान्यता के अनुसार रमा एकादशी का व्रत 5 नवंबर, गुरुवार को ही रखा जाएगा।

तिथि से जुड़ी मुख्य जानकारियां

• कार्तिक कृष्ण एकादशी तिथि का आरंभ: 4 नवंबर को सुबह 11:04 बजे से

• कार्तिक कृष्ण एकादशी तिथि का समापन: 5 नवंबर को सुबह 10:36 बजे तक

• रमा एकादशी व्रत की तिथि: 5 नवंबर, गुरुवार

रमा एकादशी की पूजा विधि

1. प्रातः स्नान व संकल्प: व्रती को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद नित्य कर्म पूरा कर पूजा स्थल की सफाई करें।

2. प्रतिमा स्थापना: एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला साफ कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। फिर चारों तरफ गंगाजल का छिड़काव करें।

3. व्रत का संकल्प: मन में भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें और पूजा शुरू करें।

4. पूजन सामग्री अर्पित करें: भगवान लक्ष्मीनारायण को चंदन, फूल, धूप और तुलसी दल अर्पित करें तथा एक शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं।

5. पाठ और कथा: पूजा के दौरान रमा एकादशी की व्रत कथा पढ़ें और विधि-विधान से भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की आरती उतारें।

6. संध्या पूजा और पारण: शाम के समय भी भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की पूजा करके भोग लगाएं। इसके बाद अगले दिन यानी द्वादशी को शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करें।

पूजा के मुख्य मंत्र

रमा एकादशी की पूजा के दौरान इन मंत्रों का जप करना शुभ माना गया है:

• भगवान विष्णु का मंत्र: 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय'

• माता लक्ष्मी का मंत्र: 'ओम श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः'

पूजा के समय श्रीसूक्त या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी फलदायी माना जाता है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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