अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भगवान राम के नाम पर सत्ता हासिल करने वाली भाजपा चंदा चोरी के मामले में प्रभावशाली लोगों को बचाने और निचले स्तर के कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराने का प्रयास कर रही है। जयराम रमेश ने इस मामले में पारदर्शी और स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए इसे आस्था के साथ विश्वासघात करार दिया।

सोमवार, 19 अक्टूबर को जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट साझा कर अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच और कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा, “चंदा चोरी, आस्था के साथ धोखा। राम के नाम पर सत्ता हासिल की, चंदा चोरी पर छाई चुप्पी। भगवान राम का नाम लेकर सत्ता में आई भाजपा चंदा चोरी के पाप से नष्ट हो जाएगी।”

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि 4 जून 2026 को मंदिर में कथित चोरी का मामला सार्वजनिक होने के बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन करने में देरी की। उनके अनुसार, सरकार ने 13 जून को एसआईटी गठित की, यानी मामला सामने आने के नौ दिन बाद। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 17 अगस्त को गृह विभाग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट सीधे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी, जिसमें ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दे दी गई।

रमेश ने कहा कि अयोध्या के श्रीराम मंदिर में कथित बड़ी चोरी का मामला 4 जून को सार्वजनिक हुआ था, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध पर नौ दिन बाद 13 जून 2026 को एसआईटी गठित की। उन्होंने आरोप लगाया कि 17 अगस्त को गृह विभाग की अंतिम रिपोर्ट उसी ट्रस्ट को सौंप दी गई, जिसने अपेक्षा के अनुरूप चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दे दी।

कांग्रेस नेता ने निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, 27 अप्रैल से 5 जून 2026 तक के सीसीटीवी फुटेज में गिनती करने वाले कर्मचारियों को 105 अलग-अलग मौकों पर नोटों की गड्डियां छिपाते हुए देखा गया। उन्होंने कहा कि 23 जून की प्रारंभिक रिपोर्ट में निगरानी संबंधी नियमों में गंभीर खामियों और नियंत्रण कक्ष खाली रहने का उल्लेख था, लेकिन निगरानी व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वालों के खिलाफ व्यापक जांच नहीं की गई।

जयराम रमेश ने कहा कि फुटेज में 105 बार नोटों की गड्डियां छिपाने की घटनाएं सामने आने के बावजूद जवाबदेही तय करने के लिए समुचित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि जब निगरानी व्यवस्था में खामियां थीं और नियंत्रण कक्ष अक्सर खाली रहता था, तो जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच क्यों नहीं की गई।

उन्होंने मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि अयोध्या के स्थानीय संतों और टिप्पणीकारों ने भी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। रमेश के अनुसार, कोषाध्यक्ष गोविंद गिरि के पास कोष की निगरानी की जिम्मेदारी थी। इसके बावजूद उन्होंने 7 जुलाई को चंपत राय की भूमिका से इनकार करते हुए उन्हें कथित घोटाले से अलग बताया। रमेश ने सवाल किया कि कोषाध्यक्ष को यह जानकारी होनी चाहिए थी कि धन कहां से आ रहा है और कहां जा रहा है, फिर भी जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया पर सवाल क्यों बने हुए हैं।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मामला सार्वजनिक होने के कई महीने बाद भी चोरी हुई नकदी और अन्य कीमती वस्तुओं की कुल मात्रा का खुलासा नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि 25 जून को प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज होने के अगले दिन गिनती से जुड़े आठ कर्मचारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, लेकिन ट्रस्ट के किसी पूर्व पदाधिकारी का नाम एफआईआर में शामिल नहीं किया गया। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जैसी केंद्रीय एजेंसियों की ओर से ट्रस्ट के पूर्व या मौजूदा पदाधिकारियों से कठोर पूछताछ नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए।

रमेश ने कहा कि देश को अब तक यह नहीं बताया गया है कि कितनी रकम या कितनी कीमती वस्तुएं चोरी हुईं। उन्होंने पूछा कि चोरी की कुल मात्रा बताए बिना जांच कैसे समाप्त कर दी गई और निगरानी व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले लोगों की भूमिका की पड़ताल क्यों नहीं हुई। उनके अनुसार, कार्रवाई में छोटे कर्मचारियों को जेल भेजा गया, जबकि ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी में नाम तक दर्ज नहीं किए गए।

जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले के सार्वजनिक होने के बाद साढ़े चार महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद दोनों नेताओं ने इस पर चुप्पी साध रखी है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में भाजपा की हार भगवान राम की ओर से पहले ही संकेत थी, लेकिन पार्टी इसे समझने में विफल रही और चढ़ावे की कथित चोरी जारी रही।

रमेश ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े लोगों की कथित भूमिका की जांच की मांग करते हुए कहा कि भाजपा सरकार से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं है। कांग्रेस की मांग है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की पूरी जांच स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जाए। उन्होंने चढ़ावे का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने, सभी जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच करने और किसी भी अधिकारी को जवाबदेही से छूट नहीं देने की मांग की। जयराम रमेश ने कहा कि सत्ता के अहंकार में डूबे चंदा चोरों को दंडित करना अब देश के नागरिकों की जिम्मेदारी है।

Pratahkal Bureau

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