आरोपों से आहत राम मंदिर के सिपाही का तीखा पलटवार— "कभी नहीं सोचा था ये दिन आएगा"
अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट पर लगे कथित दान चोरी के आरोपों पर वकील विष्णु शंकर जैन ने निष्पक्ष जांच की मांग की; सीएम योगी ने एसआईटी एक्शन के निर्देश दिए।

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के गर्भगृह में स्थापित भगवान श्रीराम लला की मूर्ति के समक्ष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान करते पुजारी, जहां हाल ही में ट्रस्ट के दान प्रबंधन को लेकर विवाद खड़ा हुआ है।
Ayodhya Ram Mandir Trust Controversy : श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के बाद देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र अयोध्या से एक ऐसा विवाद सामने आया है जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित दान चोरी के संगीन आरोपों को लेकर खड़ा हुआ विवाद अब थमता नजर नहीं आ रहा है, बल्कि समय के साथ यह और गहराता जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने उन लोगों को सबसे ज्यादा आहत किया है जिन्होंने इस मंदिर के सपने को सच करने के लिए अपने जीवन के कई साल अदालतों के चक्कर काटने में लगा दिए। राम जन्मभूमि मामले में हिंदू पक्ष के प्रमुख अधिवक्ताओं में शामिल रहे देश के प्रतिष्ठित वकील विष्णु शंकर जैन ने इस पूरे विवाद पर अत्यंत गहरी चिंता और मानसिक पीड़ा व्यक्त की है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा है कि यदि इन गंभीर आरोपों में रत्ती भर भी सच्चाई है, तो पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच होनी ही चाहिए और जो भी दोषी पाया जाए, उसे कानून के सामने जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।
विष्णु शंकर जैन वही शख्सियत हैं जिन्होंने देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि मामले की मैराथन सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की ओर से सबसे अहम कानूनी भूमिका निभाई थी। आज जब मंदिर प्रबंधन पर सवाल उठ रहे हैं, तो उनका दर्द सार्वजनिक रूप से सामने आया है। विभिन्न समाचार रिपोर्टों के माध्यम से सामने आ रहे घटनाक्रमों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन, ट्रस्टियों और विभिन्न शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ जिस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं, वह बेहद निराशाजनक और पीड़ादायक है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जब वे कोर्ट में पूरी कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे, तब उनका और उनके साथियों का मुख्य उद्देश्य केवल एक कंक्रीट का ढांचा खड़ा करना नहीं था, बल्कि एक ऐसा आदर्श राम मंदिर बनाना था जो पूरे देश और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक नैतिक मॉडल पेश कर सके। उन्होंने बेहद आहत मन से स्वीकार किया कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि एक दिन ऐसा भी देखना पड़ेगा जब पावन मंदिर के दान पर इस तरह के लांछन लगेंगे।
यह मामला अब पूरी तरह से कानूनी और आधिकारिक मोर्चे पर तूल पकड़ चुका है। इस प्रकरण में दर्ज हुई प्राथमिक प्राथमिकी यानी एफआईआर को लेकर विष्णु शंकर जैन ने एक बड़ा कानूनी पहलू सामने रखा है। उनका स्पष्ट कहना है कि वर्तमान एफआईआर में जिन लोगों के नाम दर्ज हैं, पुलिस और विशेष जांच दल यानी एसआईटी की जांच केवल उन्हीं चेहरों तक सीमित नहीं रहने वाली है। कानूनी बारीकियों को समझाते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच प्रक्रिया के दौरान यदि किसी भी अन्य रसूखदार या अज्ञात व्यक्ति की भूमिका या संलिप्तता सामने आती है, तो उसे भी तत्काल मामले में आरोपी बनाया जा सकता है। जांच एजेंसी के पास कानूनन पर्याप्त अधिकार सुरक्षित हैं और यह कतई जरूरी नहीं है कि जिसका नाम शुरुआती एफआईआर में नहीं है, वह आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई से बच जाएगा।
Champat Rai resigns on moral grounds from the post of General Secretary of the Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust; Trust member Anil Mishra also resigns. pic.twitter.com/eLT0JvA945
— ANI (@ANI) June 26, 2026
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र दान मामले में पहली एफआईआर दर्ज होने और मामला तूल पकड़ने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस पर बेहद कड़ा और आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। देवरिया में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के मंच से मुख्यमंत्री ने कड़े लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि जनभावनाओं और प्रभु श्री राम के प्रति लोगों की अटूट आस्था के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस बात की पुष्टि की है कि इस मामले में गठित एसआईटी की रिपोर्ट मिलते ही सरकार की ओर से त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी गई है और बहुत जल्द दूध का दूध और पानी का पानी अलग कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने दोटूक शब्दों में कहा कि जो कोई भी जनता की आस्था को चोट पहुंचाएगा, उसे इसकी बहुत भारी कीमत चुकानी होगी। इसके साथ ही उन्होंने राजनीतिक विरोधियों पर भी तीखा प्रहार किया और कांग्रेस व समाजवादी पार्टी का नाम लेते हुए कहा कि यह वही लोग हैं जिन्होंने कभी भगवान राम के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े किए थे। फिलहाल, इस पूरे विवाद ने देश की राजनीति और धार्मिक गलियारों में एक बड़ी हलचल पैदा कर दी है, जहां सबकी नजरें अब एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
