Ram Mandir Dhwajarohan: जाने कैसे 80 साल पुरानी फर्म ने तैयार किया विशेष तकनीकी और सुरक्षित धर्मध्वज
अयोध्या राम मंदिर का विशेष धर्मध्वज अहमदाबाद की 80 साल पुरानी कंपनी द्वारा बनाया गया। कश्यप मेवाड़ा की कंपनी ने पैराशूट-ग्रेड फैब्रिक और विशेष तकनीक से इसे टिकाऊ और सुरक्षित बनाया, जो तेज हवाओं और मौसमीय प्रभावों में भी सुरक्षित रहेगा।

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर फहराए गए भगवा धर्मध्वज ने देशभर में न सिर्फ धार्मिक उत्साह बढ़ाया, बल्कि इसकी तकनीकी उत्कृष्टता और निर्माण प्रक्रिया ने भी सभी का ध्यान खींचा। यह ध्वज गुजरात के अहमदाबाद की एक विशेष कंपनी द्वारा बनाया गया है, जिसकी विशेषज्ञता पैराशूट और पैराशूट‑ग्रेड फैब्रिक में है।
इस कंपनी के मालिक कश्यप मेवाड़ा हैं, और उनके परिवार की यह फर्म लगभग 80 साल पुरानी है। इस लंबी अवधि में कंपनी ने न केवल उच्च गुणवत्ता वाले फैब्रिक और ध्वज निर्माण में महारत हासिल की है, बल्कि पैराशूट, एयरस्पोर्ट्स, और अन्य विशेष तकनीकी उत्पादों के निर्माण में भी अपनी विशेषज्ञता साबित की है।
धर्मध्वज की तकनीकी विशेषताएँ अद्वितीय हैं। इसकी लंबाई लगभग 22 फीट और चौड़ाई 11 फीट है, जिसे मंदिर के 161 फीट ऊँचे शिखर और 42 फीट ध्वजदंड के अनुरूप डिजाइन किया गया। इस ध्वज को पैराशूट-ग्रेड नायलॉन और रेशमी धागों से तैयार किया गया है, जिससे यह तेज धूप, बारिश और हवाओं में भी सुरक्षित और टिकाऊ रहता है। ध्वज को 360 डिग्री घूमने वाले बैल बेयरिंग सिस्टम के साथ स्थापित किया गया है ताकि तेज हवाओं में भी यह क्षतिग्रस्त न हो।
निर्माण प्रक्रिया अत्यंत सावधानीपूर्वक पूरी की गई। ध्वज को तैयार करने में लगभग 25 दिन लगे, और इसे कुशल कारीगरों ने हाथों से संवारा। निर्माण के दौरान न केवल धार्मिक प्रतीकों और डिज़ाइन पर ध्यान दिया गया, बल्कि इसे सुरक्षा और टिकाऊपन के मानक अनुसार तैयार किया गया। इसके लिए विभिन्न गुणवत्ता परीक्षण और दो बार सफल ट्रायल किए गए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ध्वज लंबी अवधि तक सुरक्षित रहेगा।
कंपनी के इतिहास और सफलता की बात करें तो, कश्यप मेवाड़ा की यह फर्म पैराशूट और विशेष फैब्रिक निर्माण के क्षेत्र में अग्रणी रही है। उन्होंने देश में पहले भी कई महत्वपूर्ण और विशेष ध्वज और फैब्रिक उत्पाद तैयार किए हैं। इस अनुभव और विशेषज्ञता ने अयोध्या राम मंदिर के धर्मध्वज को न केवल धार्मिक प्रतीक बल्कि तकनीकी उपलब्धि भी बना दिया।
इस ध्वज का निर्माण न केवल मंदिर की धार्मिक गरिमा को बढ़ाता है, बल्कि यह आधुनिक तकनीक और पारंपरिक संस्कृति के मेल का उदाहरण भी प्रस्तुत करता है। यह दिखाता है कि कैसे विशेषज्ञता, अनुभव और तकनीकी कौशल मिलकर एक स्थायी और सुरक्षित प्रतीक बना सकते हैं, जो आने वाले दशकों तक गर्व और आस्था का प्रतीक बना रहेगा।
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Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
