₹25 लाख का जुर्माना और 10 साल की जेल ; जानें क्या है पंजाब में लागू किया गया 'बेअदबी' कानून
पंजाब सरकार ने 2026 में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी पर सख्त कानून लागू किया है, जिसमें 10 साल से लेकर उम्रकैद और ₹25 लाख तक जुर्माने का प्रावधान है। यह कानून धार्मिक सम्मान की रक्षा के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है, हालांकि इसके क्रियान्वयन को लेकर बहस जारी है।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान
पंजाब में धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों को लेकर लंबे समय से चल रही बहस के बीच राज्य सरकार ने एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। अप्रैल 2026 में पंजाब सरकार ने “जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026” को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया, जिससे गुरु ग्रंथ साहिब के प्रति किसी भी प्रकार की 'बेअदबी' अब बेहद कड़े दंड के दायरे में आ गई है। इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर न्यूनतम 10 वर्ष की सजा से लेकर आजीवन कारावास तक का प्रावधान किया गया है, साथ ही ₹5 लाख से ₹25 लाख तक का भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
'बेअदबी' क्या है?
सिख धर्म में गुरु ग्रंथ साहिब को जीवित गुरु के रूप में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है, ऐसे में ‘बेअदबी’ यानी किसी भी प्रकार का अनादर या असम्मान एक गंभीर और संवेदनशील अपराध माना जाता है। यह केवल शारीरिक क्षति तक सीमित नहीं है, बल्कि धार्मिक मर्यादा का उल्लंघन, अनुचित व्यवहार, या किसी भी रूप में अपमानजनक अभिव्यक्ति भी इसके अंतर्गत आती है। उदाहरण के तौर पर पवित्र ग्रंथ के पन्नों को फाड़ना, जलाना, चोरी करना, या धार्मिक नियमों जैसे सिर ढकना और जूते उतारना न मानना भी बेअदबी की श्रेणी में आता है। यहां तक कि गुरबाणी का गलत उच्चारण या अनुचित प्रस्तुति भी भावनात्मक रूप से आहत करने वाला माना जाता है।
इस नए कानून के तहत ऐसे अपराधों को संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-समझौता योग्य घोषित किया गया है, जिससे पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है और मामले में किसी तरह का समझौता संभव नहीं होगा। कानून में न्यूनतम 10 वर्ष की सजा से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है, जबकि ₹5 लाख से ₹25 लाख तक जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित किया गया है कि इन मामलों की जांच केवल डीएसपी स्तर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ही करेंगे, ताकि जांच प्रक्रिया की गंभीरता और निष्पक्षता बनी रहे।
यह विधेयक अप्रैल 2026 में पंजाब विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया था और इसके तुरंत बाद राज्यपाल की मंजूरी भी मिल गई। अधिसूचना जारी होने के साथ ही सरकार ने इसे लागू मान लिया है, हालांकि कुछ कानूनी विशेषज्ञों ने इसके क्रियान्वयन को लेकर तकनीकी अस्पष्टता की ओर इशारा किया है, खासकर इसलिए क्योंकि इसमें स्पष्ट प्रारंभ तिथि का उल्लेख नहीं किया गया है।
कानून में यह भी प्रावधान किया गया है कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) गुरु ग्रंथ साहिब के सभी स्वरूपों का एक विस्तृत रजिस्टर तैयार और बनाए रखेगी, जिससे उनकी सुरक्षा और निगरानी सुनिश्चित हो सके। साथ ही यह कानून केवल प्रत्यक्ष अपराधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे कृत्यों के पीछे साजिश रचने वालों को भी दायरे में लाता है।
विवाद और प्रतिक्रियाएं:
इस कानून को लेकर राज्य में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। सरकार और समर्थकों का मानना है कि यह कानून वर्षों से लंबित और विवादित बेअदबी मामलों पर सख्त संदेश देगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में प्रभावी साबित होगा। वहीं, आलोचकों ने इसे धार्मिक मामलों में राज्य के हस्तक्षेप के रूप में देखा है और इसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं ने भी इस कानून की स्पष्टता और संभावित पूर्वव्यापी प्रभाव को लेकर सरकार से जवाब मांगा है। पंजाब में यह नया कानून न केवल कानूनी ढांचे को मजबूत करता है, बल्कि यह दर्शाता है कि धार्मिक संवेदनाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर राज्य किस हद तक गंभीर है। आने वाले समय में इसका प्रभाव सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण रूप से देखा जाएगा।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
