सिर्फ तिल-गुड़ ही नहीं, इन 5 व्यंजनों के बिना अधूरा है संक्रांति का त्यौहार ; क्या आपने चखा इनका स्वाद?
मकर संक्रांति 2026 भारत भर में सूर्य के उत्तरायण होने और नई फसल के स्वागत का पर्व है। उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत में अलग-अलग परंपराओं और व्यंजनों के साथ यह त्योहार मनाया जाता है, जिसमें तिल-गुड़, पोंगल, पिठा और उंधियू जैसे पकवान सांस्कृतिक एकता को दर्शाते हैं।

तिल-गुड़ लड्डू
उत्तर भारत में मकर संक्रांति का भोजन:
- तिल और गुड़ से बने लड्डू, गजक और रेवड़ी प्रमुख रूप से तैयार किए जाते हैं
- खिचड़ी को पवित्र भोजन मानकर कई राज्यों में दान और सेवन किया जाता है
- पूड़ी-सब्ज़ी और दूध या चावल की खीर पर्व के पारंपरिक व्यंजन माने जाते हैं
- भोजन का स्वरूप सर्दी के मौसम में ऊर्जा और गर्माहट देने वाला होता है
दक्षिण भारत में मकर संक्रांति (पोंगल) का भोजन:
- चावल, दूध और गुड़ से बना सक्करै पोंगल सूर्य देव को अर्पित किया जाता है
- वेन पोंगल जैसे नमकीन व्यंजन भी पारंपरिक थाली का हिस्सा होते हैं
- कर्नाटक में एल्लु-बेला (तिल, गुड़, मूंगफली और नारियल का मिश्रण) बांटा जाता है
- गन्ना और पायसम नई फसल की समृद्धि का प्रतीक माने जाते हैं
- महाराष्ट्र में तिलगुल लड्डू सामाजिक मेल-मिलाप का प्रतीक हैं
- गुजरात में उंधियू, बाजरे की रोटी और मूंगफली-गुड़ की चिकी बनाई जाती है
- स्थानीय अनाज और सर्दी के अनुकूल व्यंजनों को विशेष महत्व दिया जाता है
- भोजन के साथ पतंगबाजी उत्सव का अहम हिस्सा रहती है
पूर्व भारत में मकर संक्रांति का भोजन:
- पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में चावल के आटे से बनी पिठा / पिठे तैयार किए जाते हैं
- गुड़ से बनी खीर और चूड़ा आधारित व्यंजन पारंपरिक माने जाते हैं
- नई फसल (नबान्न) के स्वागत के रूप में पर्व मनाया जाता है
- ग्रामीण जीवन और लोक संस्कृति इस दिन विशेष रूप से उभरकर सामने आती है
भारत भर में समान परंपरा:
- तिल और गुड़ लगभग पूरे देश में मकर संक्रांति का अनिवार्य हिस्सा हैं
- भोजन का संबंध सर्दी, स्वास्थ्य और नई फसल से जुड़ा होता है
- सूर्य, प्रकृति और श्रम के प्रति कृतज्ञता पर्व का मूल भाव है
- अलग-अलग स्वादों के बावजूद सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जुड़ाव समान रहता है
मकर संक्रांति 2026 यह स्पष्ट करती है कि भारत की विविधता उसके त्योहारों और भोजन में भी झलकती है। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक अलग-अलग व्यंजन और परंपराएँ होते हुए भी इस पर्व का संदेश एक ही है—प्रकृति के साथ संतुलन, मेहनत का सम्मान और समाज में मिठास बनाए रखना। यही साझा भावना मकर संक्रांति को भारत का एक सच्चा राष्ट्रीय उत्सव बनाती है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
