“होली-दिवाली पर नियम तो बकरीद पर क्यों नहीं?” बकरीद से पहले मंत्री नितेश राणे का बड़ा बयान
महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने बकरीद को “वर्चुअल” और “पर्यावरण-अनुकूल” तरीके से मनाने की सलाह देकर नया विवाद खड़ा कर दिया। होली-दिवाली और बकरीद पर पर्यावरण नियमों को लेकर उनके बयान पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पशु बलि, धार्मिक परंपरा और कानून व्यवस्था को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है।

बकरीद पर नितेश राणे के बयान से विवाद
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर धार्मिक परंपराओं, पर्यावरण और पशु अधिकारों को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। राज्य के मत्स्य एवं बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे द्वारा बकरीद को “वर्चुअल” या “पर्यावरण-अनुकूल” तरीके से मनाने की सलाह दिए जाने के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। उनके बयान ने न केवल विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का मौका दिया, बल्कि सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक धार्मिक स्वतंत्रता और पशु बलि को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई।
सोमवार को मीडिया से बातचीत के दौरान नितेश राणे ने पर्यावरणविदों और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं पर “चयनात्मक रवैया” अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि होली और दिवाली जैसे हिंदू त्योहारों पर अक्सर पटाखे न जलाने, रंगों का सीमित उपयोग करने और पर्यावरण बचाने की अपील की जाती है, लेकिन बकरीद के दौरान पशु बलि को लेकर वही लोग चुप क्यों हो जाते हैं। राणे ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि हिंदू त्योहारों के लिए “वर्चुअल” या “इको-फ्रेंडली” सेलिब्रेशन की सलाह दी जा सकती है, तो बकरीद के लिए ऐसी अपील क्यों नहीं की जाती।
Neral, Maharashtra: Minister Nitesh Rane says, "...In our Holi festival, it is said that Holi should be celebrated as per the environment, celebrate dry Holi…In diwali celebration they say do not burst crackers…They should advise people to celebrate Bakrid by putting a picture… pic.twitter.com/kC6nxTibib
— IANS (@ians_india) May 24, 2026
उन्होंने कहा कि पशु प्रेम और पर्यावरण संरक्षण के नाम पर कुछ संगठन केवल हिंदू त्योहारों को निशाना बनाते हैं। राणे ने यह भी कहा कि “यह हिंदू राष्ट्र है” और यदि डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा बनाया गया संविधान हिंदुओं पर लागू होता है, तो वही कानून मुस्लिम समुदाय पर भी समान रूप से लागू होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “कोई शरीयत कानून लागू नहीं होगा।”
राणे ने मुस्लिम समुदाय से यह भी अपील की कि वे बकरीद को “पर्यावरण-अनुकूल” तरीके से मनाने के विचार का समर्थन करें ताकि अनावश्यक विवादों से बचा जा सके और समाजों में रहने वाले हिंदुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित नियमों और कानूनी प्रावधानों का पालन किए बिना बकरों की कुर्बानी दी गई तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राणे के बयान के सामने आते ही विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। आलोचकों ने आरोप लगाया कि मंत्री जानबूझकर मुस्लिम धार्मिक परंपराओं को निशाना बना रहे हैं और इस तरह के बयान बकरीद से पहले सांप्रदायिक तनाव बढ़ा सकते हैं। विपक्ष का कहना है कि धार्मिक परंपराओं पर इस तरह सार्वजनिक टिप्पणी करना सामाजिक सौहार्द के लिए ठीक नहीं है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेता जितेंद्र आव्हाड ने राणे के बयान पर तंज कसते हुए कहा, “अब अगली बार शायद वे हमें वर्चुअल खाना खाने की भी सलाह देंगे।”
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश के कई राज्यों में बकरीद को लेकर पहले से ही सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। कई राज्य सरकारों ने सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी पर रोक, अवैध पशु वध पर कार्रवाई, पशुओं के परिवहन संबंधी नियमों और साफ-सफाई तथा कचरा प्रबंधन को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि नमाज के दौरान सड़कें अवरुद्ध न हों, कुर्बानी केवल निर्धारित स्थानों पर ही हो और प्रतिबंधित पशुओं का वध न किया जाए।
नितेश राणे का यह बयान ऐसे दौर में आया है जब धार्मिक आस्थाओं, पर्यावरण संरक्षण और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती लगातार बढ़ती जा रही है। बकरीद से पहले शुरू हुई यह बहस आने वाले दिनों में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर और अधिक गहराने के संकेत दे रही है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
