9 मई से शुरू हो रहा मासिक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत ; जानें क्यों माना जाता है इसे मोक्ष का द्वार
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति को समर्पित एक पवित्र उपवास है, जो प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस व्रत का आरंभ 09 मई और समापन 10 मई को होगा। शास्त्रों में इसे अत्यंत पुण्यदायी माना गया है, जो भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष की दिशा में अग्रसर करता है।

वासुदेव द्वारा बालक कृष्ण को यमुना पार ले जाने का चित्रण।
हिंदू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और साधना को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। इसी क्रम में प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला मासिक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। यह व्रत भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने और उनकी दिव्य कृपा प्राप्त करने के उद्देश्य से किया जाता है। विशेष रूप से वैष्णव संप्रदाय के अनुयायी इसे अत्यंत श्रद्धा और नियमपूर्वक निभाते हैं, हालांकि सामान्य भक्त भी आध्यात्मिक उन्नति और जीवन में दिव्य आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए इस व्रत का पालन करते हैं।
इस माह मासिक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत का शुभ आरंभ 09 मई को दोपहर 02:02 बजे से हो रहा है, जबकि इसका समापन 10 मई को दोपहर 03:06 बजे होगा। इस अवधि में भक्तजन उपवास और भक्ति भाव में लीन रहते हैं तथा श्रीकृष्ण के प्रति अपनी आस्था को और अधिक दृढ़ करते हैं। यह व्रत वार्षिक कृष्ण जन्माष्टमी से भिन्न है, जो भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी को मनाया जाता है। इसके विपरीत, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी प्रत्येक माह आयोजित होती है और इसका उद्देश्य निरंतर भगवान श्रीकृष्ण की स्मृति, सेवा और भक्ति में लीन रहना है। इसे मासिक कृष्णाष्टमी अथवा मासिक जन्माष्टमी के नाम से भी जाना जाता है।
व्रत के दिन भक्त प्रातःकाल पवित्र स्नान कर संकल्प लेते हैं और पूरे दिन उपवास का पालन करते हैं। संध्या समय भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या चित्र के समक्ष विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। इस पूजा में पंचामृत, तुलसी दल, माखन-मिश्री, दूध, फल, धूप और दीप जैसे पवित्र सामग्रियों का भोग अर्पित किया जाता है। भक्त श्रीमद्भागवत गीता और श्रीमद्भागवत कथा का पाठ करते हैं तथा भजन-कीर्तन के माध्यम से रात्रि जागरण कर भगवान श्रीकृष्ण के बाल लीलाओं का स्मरण करते हैं।
धार्मिक ग्रंथों में इस व्रत का विशेष उल्लेख मिलता है। स्कंद पुराण, पद्म पुराण, नारद पुराण, व्रतराज और हरिभक्ति विलास जैसे ग्रंथों में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत के महत्व को विस्तार से वर्णित किया गया है। हरिभक्ति विलास में इसे वैष्णव साधना का अनिवार्य अंग माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत को श्रद्धा और विधिपूर्वक करने से साधक को पुण्यलोक की प्राप्ति होती है तथा अंततः वह भगवान श्रीकृष्ण के परम धाम को प्राप्त करता है।
मान्यता है कि यह व्रत सांसारिक बाधाओं को दूर कर व्यक्ति को आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर करता है। इसे करने वाले भक्तों के जीवन में पवित्रता, दिव्य चेतना और आत्मिक शांति का संचार होता है। यह व्रत उन साधकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है जो भगवान श्रीकृष्ण की कृपा और आध्यात्मिक उन्नति की आकांक्षा रखते हैं।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
